गणिनी गुरु मां स्वस्ति भूषण माताजी के कर कमलो से संलेखनारत शांति देवी बाकलीवाल की हुई दीक्षा। छुल्लिका 105 श्री उपशममति माता जी के नाम से जानी जाएगी
कोटा
स्वस्ति शब्द का अर्थ बहुत ही व्यापक है और बहुत ही सार्थकता सिद्ध करता है स्वस्ति का अर्थ होता है मंगलकारी।

और ऐसा ही कोटा की धरा पर हो रहा है भारत गौरव स्वस्तिधाम प्रणेत्री परम् विदुषी लेखिका गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी के कर कमलो से दीक्षा संपन्न हुई।
यह पावन पुनीत दीक्षा श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी मन्दिर आर.के पुरम में हुई। निश्चित रूप से पूज्य गुरु मां जब कई वर्षों पूर्व जब कोटा आई थी तब भी कीर्तिमान लिखा गया और नया इतिहास बना जो युगों युगों तक जीवंत रहेगा। निश्चित रूप से आज का यह क्षण अविस्मरणीय कहा जाएगा





एक विवरण
कोटा नगर की श्रीमती शांतिदेवी बाकलीवाल विगत कई दिनों से जो सल्लेखनारत थी। आज 24 अप्रैल 2024 को गुरु मां ने छुल्लिका दीक्षा प्रदान कर उनके जीवन को धन्य किया। पूज्य गुरु मां ने दीक्षा के संस्कार करते हुए उन्हे छुल्लिका 105 श्री उपशममति माताजी का नामकरण किया अब वह इसी नाम से जानी जाएगी।
धन्य हुआ बाकलीवाल परिवार,
निश्चित रूप से बाकलीवाल परिवार के
मनोज- संगीता ( पुत्र-पुत्रवधु ) प्रतीक ( पौत्र ), मुस्कान ( पौत्री ) एवं समस्त बाकलीवाल परिवार, आर. के पुरम कोटा। सभी अपने आप को धन्य एवं गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
