150 उपवास साधक पूज्य विराग मुनि श्री ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के किए दर्शन

धर्म

150 उपवास साधक पूज्य विराग मुनि श्री ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के किए दर्शन

डोंगरगढ़
सचमुच जैन संतों की साधना निष्काम साधना हुआ करती है जैन संतों की साधना, उनकी निष्प्रहता, उनकी निर्मोहीता सचमुच अनुपम है इस पंचम युग में ऐसी साधना सचमुच जैन संत की कर सकता है।

ऐसे ही अनुपम और अभूतपूर्व क्षण आज देखने को चंद्र गिरी तीर्थ डोंगरगढ़ की पावन धरा पर देखने को मिले जब श्वेतांबर परंपरा के महान संत पूज्य विराग मुनि जी ने आज अपने 150 वें उपवास के दिन बालाघाट कि ओर विहार करते हुए डोंगरगढ़ पधारकर संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर मुनिराज के दर्शन किए व आचार्य श्री से चर्चा की।

 

 

एक विवरण


जिस बात पर हम गौर करें जो हम जिक्र करना चाह रहे हैं अगर देखा जाए तो सचमुच ऐसी साधना ऐसा तप किसी साधारण व्यक्तित्व के बस का नहीं है। सचमुच यह महान संत ही कर सकते हैं। पूज्य मुनि विराग जी अभिग्रह(आहार की विधि नहीं मिलने) पूर्ण न होने की स्थिति में आज 150वें उपवास में रहे।

यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा कि वह इतने उपवास के बाद भी इतनी तपती गर्मी में हर रोज 20-25 किमी पैदल विहार भी कर रहे हैं,

महाराज श्री केवल रोज बस पानी पीते हैं,150 दिवस से आपने इसके अतिरिक्त और कुछ ग्रहण नहीं किया।
जिनकी है निष्काम साधना जिनका साहस अदम्य है।
ऐसे महान संत के चरणों में कोटि-कोटि नमन है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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