अन्तर्मना उवाचसमय बहुमूल्य है, समय अमूल्य है, समय अनमोल है..!

धर्म

अन्तर्मना उवाचसमय बहुमूल्य है, समय अमूल्य है, समय अनमोल है..!

मूल्यों में समय को खरीदने जैसा बनाना, समय को बाजार में रखने जैसा है।जिन्हें जीवन से प्यार है, उन्हें समय के क्षण-क्षण को समग्रता के साथ, गम्भीरता के साथ जीना होगा।

 

 

 

 

समय किसी का इन्तजार नहीं करता। समय रहते यदि तुमने समय का उपयोग नहीं किया, तो मरते मरते तुम यही गाओगे —
दिल के अरमां आसूंओं में बह गये।

समय की मार बड़ी गहरी मार होती है। समय नदी के जल की तरह बहा जा रहा है। समय चलता नहीं, दौड़ता है। समय के पैर नहीं, पंख होते हैं,, और पैर वाले से पंख वाले की गति तेज होती है। कमान से छूटा तीर, मुँह से निकला शब्द, और बीता हुआ वक्त, दोबारा कभी नहीं आता। फिर तुम गाओगे —
ज़िन्दगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं जो मुकाम..वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते।

समय का उपयोग शुभ में करें अशुभ में नहीं। क्योंकि समय वो दरिया है जिसमें जितना गहरा जाओगे, उतना ही पाओगे। हिम्मत है तो कूदो और नजारा देखो,, नहीं तो अपने लौटे के पानी से नहाओ और घर जाओ। समय को गहराई से जीना ही सामायिक है। जिन्हें पार होना है, उन्हें डूबना पड़ेगा…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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