हमारा सौभाग्य की वरिष्ठ मुनि समयसागरजी महाराज का पहला आदेश मुझे मिला मुनिश्री प्रभातसागर जी महाराज

धर्म

हमारा सौभाग्य की वरिष्ठ मुनि समयसागरजी महाराज का पहला आदेश मुझे मिला मुनिश्री प्रभातसागर जी महाराज
कुंडलपुर ।
सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर की पावन धरा पर युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि संघ एवं आर्यिका संघो का समागम हो रहा है ।प्रतिदिन मुनि श्री के मंगल प्रवचन हो रहे हैं। प्रवचनों की श्रृंखला में मुनिश्री प्रभातसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि निर्यापक श्रमण मुनि श्री समयसागर जी महाराज ने बुलाया हमें लगा मीटिंगों का दौर चल रहा है हमें क्यों बुलाया हम डर से गए ।उन्होंने प्रवचन हेतु कहा, वरिष्ठ मुनिराज का आदेश मानकर प्रवचन कर रहे हैं।

 

 

सन 2007 की बात है उस समय बी एलना बारहा में वर्षायोग हुआ ।पंचास्तिकाय ग्रंथ का स्वाध्याय हो रहा था। स्वाध्याय के बाद गुरु महाराज ने बुलाया और कहा कि आपके लिए इन दो महाराज को लेकर जाना है और इनका शारीरिक परीक्षण कराना है।

 

 

 

कहां जाना है संस्कारधानी जाना है और वहां पर दो महाराज जी जो मुनि श्री विमल सागर जी महाराज जी एवं मुनि श्री पुनीत सागर जी महाराज जी आपको लेकर जाना है और परीक्षण कराना है। परीक्षण में यदि कोई त्रुटि रहती है अथवा कोई बीमारी का लक्षण मिला तो एक बड़े नगर का नाम लिया वहां तक पहुंचना है। संघ में रहकर हमारा एक भी प्रवचन नहीं हुआ। क्षुल्लक दीक्षा का जो निवेदन माइक से होता था उसमें गाथा भूल गए। माइक का बड़ा डर होता है और फिर मुनि दीक्षा का भी निवेदन किया उसमें भी गाथा भूल गए। गुरु जी से निवेदन किया आप बड़ा बनाकर भेज रहे हो मुझे कुछ आता तो नहीं है कैसे प्रवचन करेंगे ।गुरु महाराज की बात जो आर्यिका वर्ग या मुनिवर्ग प्रवचन नहीं करते वह सुने। उन्होंने कहा कि डरने की कोई बात बिल्कुल नहीं है जनता तो बुद्धू है बिना माइक डरे बोलते जाओ आपके प्रवचन अच्छे होते जाएंगे। गुरु महाराज की सलाह थी जबलपुर पहुंच गए शारीरिक परीक्षण हो गया ।जो रिपोर्ट आई वह अपने माध्यम से भेज दी गई। 30 दिन के अंदर हम संघ में पहुंच गए ।16 तारीख को क्या होने वाला है 16 तारीख को गुरु महाराज के परोक्ष में जो पद खाली था वह भरने वाला है ।वह उनकी ही आज्ञा से उनके ही निर्देश से जो उन्होंने वरिष्ठ महाराज जी लोगों को संकेत निर्देश दिए थे वह भरा जाएगा। हमारे वरिष्ठ मुनिराज समय सागर जी महाराज कितने वरिष्ठ हैं । बहुत सारे लोगों की उम्र उतनी नहीं है जितनी समयसागर जी महाराज को मुनि दीक्षा लिए हो गई।समयसागर जी महाराज ने कितने लोगों को कितने ब्रह्मचारी भाइयों को आर्यिका वर्ग में कई लोगों को बड़ा प्रोत्साहन दिया। उन्होंने इस मार्ग पर आने के लिए उन सब को याद होगा ।कितना प्रोत्साहन देते हैं वह संसार का सबसे उत्कृष्ट मार्ग यही है महिला वर्ग के लिए भी ।समयसागर महाराज ने जब गुरु महाराज के स्वास्थ्य में प्रतिकूलता दिख रही थी तब सघ में सबने विचार किया गुरु महाराज की ओर बिहार करना चाहिए ।यथायोग तरीके से सब ने बिहार किया बिहार कर रहे थे उस समय संभव सागर जी महाराज जी ,अभय सागर जी महाराज जी ,नीरससागर जी महाराज जी ,निरीहसागर जी महाराज जी, निरोग सागर जी महाराज पांच महाराज जी निकले दूसरे संघ के पांच महाराज भी निकले ।हमें बोला गया दोनों संघ के क्षुल्लक जी को लाना है और फिर धीरे-धीरे बिहार करके सिवनी से आगे धारणा नामक गांव था वहां तक हम लोगों ने बिहार किया ।बिहार करने के बाद जब यह समाचार मिला 17 फरवरी की वह खबर आई संलेखना होने के बाद पहला आदेश मुझे मिला। खबर आई आपको पूरे संघ को कुंडलपुर ले जाना है ।हमारा सौभाग्य था मुनि श्री समय सागर जी महाराज का पहला आदेश मुझे मिला।

राजेश जैन रागी/रत्नेश जैन बकस्वाहा से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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