आर्यिका दृढ़मति माताजी का दमोह नगर में हुआ मंगल प्रवेश समाज ने की मंगल अगवानी हम अपने गुरु का उपकार सिद्ध बनकर भी नहीं चुका सकते दृढ़मति माताजी

धर्म

आर्यिका दृढ़मति माताजी का दमोह नगर में हुआ मंगल प्रवेश समाज ने की मंगल अगवानी हम अपने गुरु का उपकार सिद्ध बनकर भी नहीं चुका सकते दृढ़मति माताजी

दमोह

आर्यिका 105 दृढ़मति माताजी के साथ 19 माताजी का दमोह नगर आगमन पर मंगल प्रवेश के अवसर पर समाज के द्वारा भव्य अगवानी की गई। दमोह में विराजमान आर्यिका संघ ने भी जैन भवन स्टेशन चौराहा तक पहुंचकर आर्यिका गुरुमति माताजी संघ की मंगल अगवानी की।

 

 

मंगल अगवानी हेतु दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष सुधीर सिंघई,नन्हे मंदिर कमेटी अध्यक्ष नवीन निराला, कुंडलपुर कमेटी के पूर्व प्रचार मंत्री सुनील वेजीटेरियन, रिशु सावन सिंघई, शैलेंद्र, मयूर, संदीप

 

 

 

मोदी,रानू, पारस, विनय,विनम्र, राजेश आदि की विशेष उपस्थिति रही। 

आर्यिका संघ ने एकलव्य विश्वविद्यालय से पद विहार करते हुए सागर नाका जैन मंदिर पहुंच कर मंदिर में दर्शन लाभ लिया।

 

तत्पश्चात गाजे बाजे के साथ दिगंबर जैन धर्मशाला आई।जहां पर मंगल प्रवचन हुए प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की मंगल पूजन हुई इस मौके पर आर्यका दृढ़मति माताजी ने अपने मंगल प्रवचनों ने कहा कि हम अपने गुरु का उपकार सिद्ध बनकर भी नहीं चुका सकते।

 

गुरु हमारे जीवन में मां से बढ़कर होता है। वह मां की तरह हमें भरण पोषण के साथ उंगली पकड़कर चलना सिखाते हैं। गुरु ने हमें चलना सिखाया, अटकने, भटकने पर मार्ग पर पुनः स्थापित किया। गुरु हमें समता और साहस दोनों सिखाते हैं। संत के लिए समता और साहस दोनों की आवश्यकता होती है। इसके पूर्व दो वर्ष पहले कुंडलपुर में संतों का महा मिलन हुआ था पर उस समय गुरु के दर्शन की ऊर्जा हमारे अंदर थी। गुरु का आशीष पाने की ललक थी ।अभी भी सभी लोग इस दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। पर अब हमारी दशा कुछ अलग है।किंतु हमें धैर्य और साहस के साथ अपने आप को जागृत रखना है, और गुरु के बताएं मार्ग पर चलना है। किसी को नहीं पता था कि कुंडलपुर महोत्सव के बाद गुरुदेव का महा बिहार हो जाएगा।
आर्यिका गुरुमति माताजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि कभी हमारा सम्यत्व नहीं छूटना चाहिए। मरण हमारा उच्च संलेखना पूर्वक होना चाहिए। इसी में हमारे जीवन की सार्थकता है।

 

 

हमारे गुरुदेव एक महान व्यक्तित्व थे उनके बारे में जो कुछ भी कहा जाए थोड़ा है जो गुरु जी ने कहा उसे अपने जीवन में आचरण में उतारा उन्होंने पूर्व से ही संकेत दिए थे किंतु हम उनके संकेत को नहीं समझ पाए और वह उत्कृष्ट सल्लेखना के साथ अपने जीवन का कल्याण कर गए उनका पुण्य तीर्थंकर के समान है, कर्म के उदय में साधारण व्यक्ति घबरा जाते हैं जिस तरह नदी के तेज बहाव में अच्छे तैराक भी डगमगा जाते हैं अच्छा तैराक भी कई वाले पत्थर पर फिसल जाता है इसलिए हमें उसे बचना है गुरुदेव आज हमारे बीच में नहीं है किंतु वह हमारे हृदय से कभी नहीं जा सकते।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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