आज के दिन राजपूताना से राजस्थान राज्य बना था सरदार पटेल के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता
महाराणा प्रताप की भूमि, रणवीरों की भूमि, धरती धोरा री ऐसा उत्कृष्ट स्थान लिए हुए राजस्थान राज्य का निर्माण हुआ था। और इस दिन को राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान का ही परिणाम है कि आज राजस्थान एक राज्य के रूप में विकसित है।


और उन्हें आज के दिन याद किया जाना चाहिए यह उन्हीं की दूरदर्शिता थी जो राजस्थान आज राज्य के रूप में विकसित दिख रहा है। उनके योगदान के साथ हमें राजस्थान के वीर शूरवीर, एवं दृढ़ इच्छाशक्ति एवं उनके बलिदान को नमन करना चाहिए।

यदि हम राजस्थान के पूर्व के इतिहास के रूप में जाने तो इससे पहले राजस्थान को राजपूताना के नाम से जाना जाता था तथा कुल 19 रियासतों को मिलाकर यह राज्य बना तथा इसका नाम “राजस्थान” किया गया जिसका शाब्दिक अर्थ है “राजाओं का स्थान” क्योंकि स्वतन्त्रता से पूर्व यहाँ कई राजा-महाराजाओं ने राज किया।
राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में हुआ।


इसकी शुरुआत 18 अप्रैल 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली रियासतों के विलय से हुई। विभिन्न चरणों में रियासतें जुड़ती गईं तथा अन्त में 30 मार्च 1949 को जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों के विलय से “वृहत्तर राजस्थान सङ्घ” बना और इसे ही राजस्थान स्थापना दिवस कहा जाता है।[ आज हम राजस्थान दिवस का 75वीं वर्षगांठ बना रहे हैं जो हम सभी राजस्थान के लिए गौरव का विषय है।
हम सबका है हृदय प्राण
इसीलिए मेरा राजस्थान महान
जन गण भारत की शान
आओ हम सब मिलकर बोलेंगे जय जय राजस्थान।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
