आर्यिका 105 मृदुमति माताजी का रहली में हुआ मंगल आगमन
रहली
आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका 105 मृदुमति माता जी का मंगल आगमन रहली नगर में हुआ।
सभी समाज बंधुओ ने सागर रोड पहुंचकर माता जी की मंगल आगवानी की एवं उन्हें जय जयकार बजरिया स्थित जैन मंदिर लाया गया।
एक परिचय माताजीका। 
पूज्य माता जी की जन्म भूमि बलेह रहली है, पूज्य माताजी ने अपनी जन्मभूमि पर कक्षा 5 तक शिक्षा अध्ययन की। उसके बाद उनका मन सांसारिक चक्र में नहीं लगा और संसार से व्यक्ति का भाव लेकर वैराग्य पथ की ओर बढ़ गई।





और समय आया 10 फरवरी 1987 का जब नैना गिरी में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के द्वारा उन्हें आर्यिका दीक्षा प्रदान की गई। पूज्य माताजी को संस्कृत, प्राकृत, भाषा का पूर्ण ज्ञान है एवं उनके द्वारा कई रचनाए की जा चुकी है।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमण्डी की रिपोर्ट 9929747312
