खुद को खुश रखना एक कला ::- गुरु मां विज्ञाश्री माताजी

धर्म

खुद को खुश रखना एक कला ::- गुरु मां विज्ञाश्री माताजी
गुंसी
अपने आप को खुश रखे यही जीवन चलने का नाम है, और जीवन में जितना खुश रहेंगे उतना अच्छा आपका जीवन बीतेगा। यह बात गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ गुंसी (राज.) के शांतिनाथ चैत्यालय के मध्य कही । उन्होनें आगे कहा कि – खुद को चेंज करने के लिए अपने आप को खुश रखे, अपने आप को सोशल वर्क में रखे, किसी की मदद करे,

 

 

 

दुसरो की खुशियों में शामिल हो लेकिन उनसे चिढ़े या जले मत, खुद को खुश रखना भी एक बड़ी कला है, जीवन का सबसे बड़ा मन्त्र ही यही है की खुश रहो और फिर खुश रहना आपकी मदद भी करेगा खुद को बदलने के लिए ।

 

 


पूज्य माताजी के मुखारविंद से अभिषेक शांतिधारा करने का पुण्य महेश मोटूका , पंकज सारसोप वाले निवाई वालों ने प्राप्त किया । गुरु मां ससंघ की निर्विघ्न आहारचर्या कराने का अवसर शिमला मोटूका , संजू ललवाड़ी , पिंकी सारसोप निवाई वाले एवं व्रती आश्रम के व्रतियों ने प्राप्त किया ।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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