अन्तर्मना उवाच* *वक्त का पासा, कभी भी पलट सकता है..इसलिए वही सितम कर, जो तू सह सके..!*

धर्म

अन्तर्मना उवाच* *वक्त का पासा, कभी भी पलट सकता है..इसलिए वही सितम कर, जो तू सह सके..!*

*वक्त का पासा, कभी भी पलट सकता है..
*इसलिए वही सितम कर, जो तू सह सके..!*

*किसी ने हमसे पूछा-?* अहिंसा का अर्थ क्या है? *हमने कम शब्दों में कहा –* जियो और जीने दो। अर्थात *खुद भी जियो और दूसरों को भी जीने दो,* तथा स्वयं भी फलो — फूलो और दूसरों को भी फलने फूलने दो, का जीवन जीना होगा। तभी इस राष्ट्र के साथ-साथ पूरे विश्व में शांति, प्रेम, सदभाव और अहिंसा का वातावरण निर्मित हो सकेगा। घायल मानवता के घाव का उपचार हो सकेगा।

 

 

 

*मानव जीवन के तीन कर्तव्य और दायित्व होते हैं* —
🔸 *पहला* अपने जीवन के लिए,
🔸 *दूसरा* समाज के लिए, और
🔸 *तीसरा* राष्ट्र के लिये।

 

 

*आज हमारे विचार और भावनाएं बहुत संकीर्ण और संकुचित हो गई है।* हम अपने परिवार के अलावा आगे के कर्तव्यों और दायित्वों के बारे में सोचते भी नहीं है। *एक स्वस्थ समाज तथा सर्व प्रभुता संपन्न राष्ट्र के लिए, हमें प्रत्येक दायित्व पर खरा उतरना होगा।*
अन्यथा —
*जिसकी जैसी नियत, वो वैसी कहानी रखता है..*
*कोई परिन्दों के लिए बन्दूक, तो कोई पानी रखता है…!!!* नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *