*देवाधिदेव भगवान श्री चन्द्रप्रभु स्वामी की अनुकम्पा,तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी,गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुंथुसागर जी भगवन्तों के दिव्य हस्तो से पल्लवित,प्रज्ञायोगी आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव के पावन वर्षायोग सन 2015 में पूज्य आचार्य श्री द्वारा श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन जिनालय के जीर्णोद्धार की मूल प्रेरणा व आधारस्तम्भ रखा गया, जिसका राष्ट्र गौरव चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी गुरूराज द्वारा 30 जनवरी सन 2020 में जिनालय जीर्णोद्धार हेतु मूलनायक प्रातिमा सहित उत्थापन कर कार्य प्रारम्भ किया गया।साथ ही आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरूराज ने सकल जैन समाज को जिनालय जीर्णोद्धार हेतु आवश्यक संकल्प व दिशा निर्देश प्रदान किये।*
*आज 6 फरवरी 2022 को अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सहिंतासुरी प्रतिष्ठाचार्य श्री हंसमुख जी के तत्वाधान में जिनालय के जिनपद सेवक दयालु देव श्री क्षेत्रपाल जी को पुरानी वेदी से उत्थापन कर नवीन वेदी पर विराजमान किया गया*

*सेठ धनराज पन्नालाल,सेठ देवेंद्र मंगल जी व शाह रमेश जडाव चन्द्र जी परिवार ने क्षेत्रपाल देव प्रतिमा की स्थापना,पूजा व मंत्र आहुति का लाभ प्राप्त किया*
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