लता से जुड़ा वाकया
जब लतामंगेश्कर द्वारा ए मेरे वतन के लोगों का गीत पहली बार गाया गया, तब पंडित नेहरू की आंखों में आंसू थे। ऐसे मार्मिक गीतों को स्वर देने वाली, लता आज हमारे बीच नही है। लेकिन उनके नगमे उनके गीत सदा सदा गुन गुनाये जाएगे।
जब लता दीदी के द्वारा “णमोकार मंत्र है प्यारा” को अपने स्वर में गाया गया, वह जैन जगत ही नही सम्पूर्ण विश्व के लिए
एक नया कीर्तिमान बना गया। आज भी यह गीत के साथ ही जैन महिला संगीत की शुरुआत इसी मंगलाचरण से होती है। जो किसी से अछूता नही है।आज देश ने संगीत का एक पुरोधा ही नही बल्कि एक महारतन खो दिया।
जन जन की लता दीदी नही रही।
वे चली गयी,सरस्वती के देश, देवियों के देश।
ज्योति सी बुझ गयी, पँचतत्व में पँचतत्व मिल गए।
अब लता दीदी न केवल एक याद है, बल्कि वे एक पाथेय है, एक ध्येय है, एक कीर्ति स्तंभ है।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
