स्वस्ति भूषण माताजी ने शिवपुरी से बिहार करते हुए केंद्रीय जेल के कैदियों को किया संबोधित जीवन में ऐसा काम ना करें जो अपमानजनक हो।
शिवपुरी
स्वस्तिधाम प्रणेता गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने शिवपुरी से बिहार करते हुए शिवपुरी जेल का निरीक्षण किया एवं वहा पर मौजूद बंदियों भी संबोधित किया।
स्वस्तिधाम प्रणेता गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पाप की चुपड़ी रोटी से मेहनत की सूखी रोटी भली है।

लेकिन यह बात अभियान में व्यक्ति को समझ में नहीं आती और मानव जब चोट खाता है तब उसे यह बात समझ आती है। और जब वह पाप करने के बाद चोट खाता है और जब वह है उसकी सजा भोगता है, तब जाकर उसे समझ आता है की कितना बड़ा अपराध किया है। इसलिए जीवन में ऐसा कार्य न करें जो अपमानजनक हो, किसी को पीड़ा पहुंचाने वाला हो, और जिससे दूसरे को कष्ट पहुंचे।
यदि इतना हमने सीख लिया तो हमारा जीवन जीना आसान हो जाएगा। और आप कभी बुरे कर्म नहीं करेंगे। शिवपुरी सर्किल जेल में 316 बंदियों एवम जेल प्रबंधन समिति को कहीं।

पूज्य माताजी सर्किल जेल अधीक्षक रमेश चंद्र आर्य के निवेदन पर जेल में मोजूद बंदियों को उद्बोधन प्रदान किया। माताजी ने कहा कि साप का जहर तो हानिकारक होता है। लेकिन जब व्यक्ति को कैंसर की बीमारी हो जाती है तो इस जहर को बहुत थोड़ी मात्रा में देकर कैंसर जैसी घातक बीमारी को दूर डॉक्टर द्वारा किया जाता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि हमें कितनी मात्रा में चीज लेनी है। यही बातें पापों के साथ घटित होती है।




माताजी ने कहा आम तौर पर हम जब बच्चो को डाटते है तो वह भी रूष्ट होते है, लेकिन हम उन्हें इतना नहीं मारते हैं उनकी जान चली जाए, या फिर शारीरिक रूप से उन्हें बड़ा कष्ट पहुंचे।

सिर्फ समझाइश के दृष्टिकोण से उन्हें डाटते फटकारते हैं। लेकिन क्रोध केआवेश में जब बुद्धि सो जाती है, तब जीवन की बुराईयो का उदय होता है। और व्यक्ति गलती कर बैठता है।

उसे यह भान भी नहीं रहता है कि, गलत काम करने के बाद उसे क्या सजा मिलेगी। और उसकी सजा का बीवी बच्चे बुजुर्ग माता-पिता पर क्या असर पड़ेगा।

जिस दिन हमने यह सोच लिया हम स्वयं के लिए नहीं परिवार के लिए जिम्मेदारी के साथ जीते हैं, और उनके प्रति हमारा दायित्व है, जितना हम स्वयं के प्रति मानते हैं। तो तय मानिएगा आपपाप कार्य और बुराई से बच जाएंगे।

जन उत्थान की बातें जेल परिसर में होगी अंकित
धर्म सभा के दौरान जेलर एवं अधीक्षक रमेशचंद्र आर्य ने आर्यिका माताजी के प्रवचन को बंदियों के साथ साथ जेल प्रबंधन के लिए भी उपयोगी बताया। साथ यह भी कहा कि उनके सदसाहित्य में जो जन उत्थान की बातें लिखी हैं, उन्हें जेल परिसर में पटल पर अंकित कराएंगे। आयोजन के अंत में ए मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हो हमारे कदम गायन के साथ सामूहिक रूप से बेहतर जीवन बनाने का संकल्प बंदियों ने लिया। और भविष्य में हिंसा, झूठ, चोरी,कुशील, परिग्रह जो पांच पाप जैन दर्शन में बताए हैं, उनको समझकर बुराइयों से भागने की बात भी कही।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
