गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी सानिध्य में सिद्ध चक्र महामंडल विधान का हुआ शुभारंभ हम सब ऐसे मुनिराजो की आराधना कर अपनी कर्म निर्जरा करें जो सिद्ध मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं स्वस्ति भूषण माताजी
शिवपुरी
स्वस्ति धाम प्रणेता गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी सानिध्य में सिद्ध चक्र महामंडल विधान का शुभारंभ हो गया।
पूज्य माताजी ने अपने उद्बोधन में सिद्ध चक्र महामंडल विधान के विषय में बताया एक भजन के गीत के साथ माताजी ने कहा सिद्धों की श्रेणी में आने वाला जिनका नाम है जबकि उन सब मुनिराजो को मेरा नम्र प्रणाम है।
यह पंक्तियां यह उल्लेख करती हैं कि भगवान सिद्ध बनने का अभ्यास अपने गुणों के माध्यम से करते हैं वह दिगंबर मुनिराज हैं। और हम सब ऐसे मुनिराजो की आराधना कर अपनी कर्म निर्जरा करें, जो सिद्धों के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। 
पारसनाथ मंदिर में पुरानी शिवपुरी महिला मंडल द्वारा सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए माताजी ने कहा कि सिद्ध चक्र महामंडल विधान की हम सबके लिए सिद्ध परमेष्ठी के गुणों के बारे में बताएगी। हम सब भी उनके गुणों को पहचाने, और अपने आत्म कल्याण की भावना भाए तो निश्चित रूप से हम सिद्ध तत्व की दशा को प्राप्त कर सकते हैं। 






आयोजन के बारे में प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र कुमार जैन ने बताया कि 8,16,32,64,128,256,512,1024 अर्ध समर्पित किए जाएंगे। आयोजन की क्रम में सर्वप्रथम ध्वजारोहण एन के जैन यूटीआई द्वारा किया गया। कलश स्थापना त्रिशला मंडल की अध्यक्ष पदमा जैन ने की दीप प्रज्वलन समाज के अध्यक्ष चौधरी अजीत जैन एवं समस्त कमेटी द्वारा किया गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
