पंचकल्याणक महोत्सव के दौरानपाषाण से बने भगवान प्रतिमा को श्रद्धा से प्रतिष्ठित किया गया श्रेष्ठ फल दान आहार दान _मुनि श्री

धर्म

पंचकल्याणक महोत्सव के दौरानपाषाण से बने भगवान प्रतिमा को श्रद्धा से प्रतिष्ठित किया गया श्रेष्ठ फल दान आहार दान _मुनि श्री

निंबाहेड़ा ।   
नगर में दिगंबर जैन धर्मावलंबियों ने पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन मंगलवार को ज्ञान कल्याणक दिवस पर भगवन की आहार चर्या पडगाहन विधि के साथ भव्य समोसरण की रचना कर उनकी दिव्यध्वनि खिरने के कार्यक्रम को अभिनीत किया।

 

 

समाज के प्रवक्ता मनोज सोनी ने बताया की आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनिश्री विमलसागर जी , मुनिश्री अनंतसागर जी , मुनिश्री धर्मसागर जी एवं मुनिश्री भावसागर जी के सानिध्य में एवं ब्रह्मचारी प्रदीप भैयाजी ‘सुयश’ अशोक नगर के निर्देशन में आदिनाथ मांगलिक भवन में आनंद प्रदायक पंचकल्याणक महामहोत्सव के अंतर्गत मंगलवार को श्रद्धालुओ ने ज्ञान कल्याणक की मांगलिक क्रियाएं संपन्न की। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने
प्रातःकालीन बेला में मंगलाष्टक, दिग्बंधन, रक्षामंत्र, शांतिमंत्र नित्यमह अभिषेक, शान्तिधारा ,पूजन , ,तपकल्याणक पूजन, शांतिहवन भी सम्पन्न कराया कार्यक्रम में नवदीक्षित महामुनिराज की आहारचर्या हुई।

 

 
मध्यान्ह बेला में धर्मावलंबीयो ने मंगलाष्टक, दिग्बंधन, रक्षामंत्र, शांतिमंत्र, भक्तिपाठ,ज्ञान कल्याणक की आंतरिक क्रियाएं, जाप अनुष्ठान , श्री जी की स्थापना, मंत्र आराधना , अधिवासन, तिलक दान,नेत्रोन्मीलन, सूरिमंत्र, प्राणप्रतिष्ठा मंत्र, सूर्यकला चंद्रकला, केवल ज्ञानोत्पत्ति, समवशरण रचना, आयोज्य कार्यक्रम में मुनि श्री द्वारा भगवान की दिव्य ध्वनि देशना पर वाणी के माध्यम से आशीर्वचन देकर ज्ञानकल्याणक पूजन हवन आदि संपन्न कराया। सांयकालीन बेला में संगीतमय महाआरती के लाभार्थी चंद्रा संजय पाटोदी को उनके निवास से गजराज पर समाज जनों द्वारा सम्मान से लाया गया। इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमल सागर जी महाराज ने कहा कि विवेक से दान करें, कब कैसा भोजन करना यह ज्ञान होना चाहिए ,श्रेष्ठ फल दान का बताया है, मंदिर में ऐसे वस्त्र पहन कर जाना चाहिए जो धरती में धूल से स्पर्श नहीं करें, नवधा भक्ति पूर्वक दिया गया दान सर्वश्रेष्ठ होता है, प्रसन्नता के साथ दान देना चाहिए, षटकाय के जीवों की जो हिंसा होती है, वह पाप दान से धुलता है, आहार दान महान बनाता है ,आहार दान के माध्यम से जीवन दान दिया जाता है ,पहली रोटी गाय की होती है ,सर्वस्व दान बड़ा दान है ,जो है उसी में से दान करके पुण्य का संचय करो, ग्रंथ में आता है हर्ष रूपी आंसुओं से पैर धुलाये, अक्षय तृतीया के दिन आहार की प्राप्ति हुई थी इसीलिए यह तिथि अक्षय हो गई , राजा श्रेयांश जयप्रकाश पटवारी, राजा सोम दीपेश दावड़ा को नवदीक्षित वृषभसागर जी महाराज को आहार दान का सौभाग्य प्राप्त हुआ

 

 

इधर 14 फरवरी बुधवार को पंचकल्याणक महा महोत्सव का समापन मंगलाष्टक, दिग्बंधन, रक्षामंत्र, शांतिमंत्र , नित्यमह अभिषेक, शान्तिधारा, पूजन , नव प्रभात की नई किरण के साथ भगवान आदिनाथ को निर्वाण प्राप्ति (मोक्षगमन) अग्नि कुमार देवो का आगमन , नख केश विसर्जन, सिद्ध गुणारोपण विधि, सिद्ध पूजन, मोक्ष कल्याणक पूजन, विश्व शांति महायज्ञ एवं मुनि श्री का प्रवचन के अलावा।
दोपहर को रथ यात्रा श्री जी की विशाल शोभायात्रा,अभिषेक, श्रीजी का विहार,नवीन वेदी पर ,प्रतिमा विराजमान, कलाशारोहण, ध्वजदंड स्थापित ,महामस्तकाभिषेक, कलशारोहण , ध्वजदंड स्थापित कर महामस्तकाभिषेक के साथ संपन्न होगा।

संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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