अन्तर्मना उवाच (09 फरवरी!)रोज रात को सोने से पहले एक ऐसा संकल्प लें. आपको सुबह उठने को मजबूर करे.. प्रसन्नसागर महाराज
ध्यान रखना!
गृह प्रवेश का तो मुहूर्त है, परन्तु गृह त्याग करने का मुहूर्त नहीं। जन्म, मृत्यु और वैराग्य का कोई मुहूर्त नहीं होता। *जन्म लेने वाला बालक मुहूर्त देखकर नहीं आता और मरने वाला व्यक्ति मुहूर्त देखकर नहीं मरता। एक बहुत बड़े ज्योतिषी ने अयोध्या में घोषणा की — मैं फलां तारीख को, इतने बजकर, इतने मिनट पर मृत्यु को उपलब्ध हो जाऊँगा। यह घोषणा सुनते ही देश का सारा मीडिया अयोध्या पहुँच गया। वहाँ ज्योतिषी बैठा है। अब मृत्यु का समय 30 मिनट बचा है। 30 मिनट भी पुरे हो गये और अभी तक वह ज्योतिषी दूसरों की कुण्डली देख रहा है।
*मित्रो! इन तीन पर कभी ज्यादा भरोसा मत करना – मन, स्वांस और पुण्य पर।* ये कभी भी धोखा दे सकते हैं। इसलिए





*कभी भी शुभ कार्य को, पुण्य कर्म को, सत्संगति को, कल पर मत टालना।* शुभ कार्य को आज, अभी और इसी वक्त समझदार इन्सान को कर लेना चाहिए। अच्छे विचार मन में कभी कभी तो आते हैं। अगर उन्हें भी पूरा करने में टाल मटोल किया तो वे यूं ही मर जायेंगे। उन शुभ विचारों की तो भ्रूण हत्या ही हो जायेगी। इसलिए *शुभ कार्य को आज, अभी कर लेना और पाप कर्म को कल पर टाल देना…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
