समय और शब्द दोनों का उपयोग लापरवाही से ना करे क्योंकि ये दोनों ना दोबारा आते हैं ना मौका देते हैं। विज्ञाश्री माताजी

धर्म

समय और शब्द दोनों का उपयोग लापरवाही से ना करे क्योंकि ये दोनों ना दोबारा आते हैं ना मौका देते हैं। विज्ञाश्री माताजी
गुन्सी
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी (राज) में विराजमान गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने श्रद्धालुओं को धर्मोपदेश देते हुए कहा कि – जीवन जीना इतना आसान नहीं है। ज्यादा बोलो तो लोग पागल समझते है, कम बोलो तो घमंडी समझते है और काम की बात करो तो मतलबी समझते है। समय और शब्द दोनों का उपयोग लापरवाही से ना करे क्योंकि ये दोनों ना दोबारा आते हैं ना मौका देते हैं।

 

 

तारीफ करने वाले शब्दों से ज्यादा, गलतियां निकालने वालों के शब्दों को गंभीरता से लो। उसी में आपके उज्ज्वल जीवन के रहस्य की चाबी छुपी है।

साधनारत पूज्य गुरुमाँ ने आज सर्वोत्कृष्ट तप ‘अनशन’ को धारण कर अहिंसा महाव्रत का पालन कर रही है।

 

विज्ञातीर्थ क्षेत्र पर चल रही । दीक्षा दिवस महोत्सव संबंधित गतिविधियों पर चर्चा हेतु पं. विमल बनेठा एवं समिति के कोषाध्यक्ष प्रकाशचंद छाबडा व महिला परिषद की अन्तरिम अध्यक्ष सुमित्रा छाबडा जयपुर ने सहभागिता दिखाई एवं गुरुमां का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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