इस तन के अंदर चेतन राम बसे हुए हैं, यदि हम इसे जगा ले तो हमारी आत्मा का कल्याण हो सकता है स्वस्ति भूषण माताजी

धर्म

इस तन के अंदर चेतन राम बसे हुए हैं, यदि हम इसे जगा ले तो हमारी आत्मा का कल्याण हो सकता है स्वस्ति भूषण माताजी
शिवपुरी
स्वस्तिधाम प्रणेता गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने धर्म सभा को दिगंबर जैन छतरी मंदिर में अपने मंगल प्रवचन में स्वाध्याय करने पर जोर दिया।

 

 

अपनी मंगल वाणी में माताजी ने कहा कि इस तन के अंदर चेतनराम बसे हुए है। यदि हम इसे जगा ले तो हमारी आत्मा का कल्याण हो सकता है। इसीलिए तन और चेतन हमें दोनों की चिंता करनी होगी। यदि हम तन को बेहतर रखेंगे और उसे उज्जवल संस्कार देंगे तो हमारी चेतना यानी हमारी आत्मा पवित्र होगी। वह भी क्षेत्र कार्य करने को उद्धत होगी।     

 

पूज्य माताजी ने वर्तमान परिपेक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हम बहुत से शब्दों और उनके भावों को समझने में भूल कर बैठते हैं, और यही वजह है कि स्वाध्याय हमारा है नहीं, गुरुओ से हमने ज्ञान अर्जित किया ही नहीं। इसके बावजूद हम जिनवाणी की जगह मनवाणी उसमें लगा देते हैं। नतीजा यह होता है कि ईश्वर ने जो हम सबको सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा जो दी है, उसे तो अनुसरण नहीं करते, वरण अपने अनुसार मनमानी लगाकर जो हम स्वयं पर लागू करते हैं उसके परिणाम विपरीत मिलते हैं। उन्होंने कहा कि इसीलिए श्रावक श्राविकाओं को चाहिए कि वह जिनवाणी को बेहतर ढंग से श्रवण करें, और चिंतन मनन कर उसे समझने का प्रयास करें। अगर मनमानी शुरू कर देंगे तो शास्त्रों का अर्थ ही बदल जाएगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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