14वर्षो के बाद गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी का शिवपुरी में हुआ मंगल प्रवेश स्कूली पाठ्यक्रम में जैन धर्म के संस्कारों को जोड़ने की बात माताजी ने कही

धर्म

14वर्षो के बाद गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी का शिवपुरी में हुआ मंगल प्रवेश स्कूली पाठ्यक्रम में जैन धर्म के संस्कारों को जोड़ने की बात माताजी ने कही

शिवपुरी
स्वस्तिधाम प्रणेता गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी संघ का 14 वर्षों के बाद शिवपुरी नगर में मंगल प्रवेश हुआ जगह -जगह माता जी की अगवानी की गई एवं उनका पद प्रक्षालन कर उनके मंगल आरती की गई।

14 वर्षों के उपरांत नगर में आने पर बच्चों में काफी उत्साह देखा गया पूज्य माताजी सन 1992 में प्रथम बार आर्यिका 105 सृष्टि भूषण माताजी एवं मुक्तिभूषण माता जी के साथ ब्रह्मचर्य अवस्था में आई थी।

 

उसके बाद वे उन्होंने 2010 के मई माह में विद्याभूषण आचार्य सन्मति सागर महाराज से दीक्षा ली थी।14 वर्षों के बाद आने पर माताजी ने पुरानी स्मृतियों को भी सांझा किया।

विद्याभूषण आचार्य सन्मति सागर महाराज की प्रेरणा से ही अतिशय क्षेत्र छतरी मंदिर के निर्माण का कार्य पूर्ण हुआ था। 2010 में पूज्य माता जी ने उस समय संस्कार शिविर के माध्यम से कई बच्चो, एवम कई युवाओं को धर्म के संस्कार दिए दिए थे। और सभी वर्ग को धर्म से जोड़ा था और धर्म का ज्ञान कराया था।

उत्साह भरे वातावरण में माताजी ने जिनालय के दर्शन किए पूज्य माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि जैन धर्म के संस्कारों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया जाए तो बच्चों में सकारात्मक बदलाव आएगा।

उन्होंने जैन धर्म के 10 धर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि 10 धर्म के साथ अहिंसा, सत्य, अचोर्य, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य के सिद्धांत को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर जन-जन तक पहुंचाया जाए। इससे लोग चरित्रवान बनेंगे, और नैतिकता का जागरण होगा।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यदि बच्चों में बचपन में स्कूली शिक्षा में ही नैतिकता का पाठ पढ़ा दिया जाए तो वह श्रेष्ठ नागरिक इस देश के बनेंगे।

उन्होंने सरकार की और ध्यान दिलाते हुए कहा कि इसीलिए सरकार को स्कूल पाठ्यक्रम में जैन धर्म के सिद्धांतों को शामिल करें। इससे बच्चे भगवान महावीर की वाणी को बचपन से ही पढ़कर अपनी आत्मा का कल्याण कर पाएंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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