दिव्य अलौकिक तीर्थ शीतल तीर्थ रतलाम

धर्म

दिव्य अलौकिक तीर्थ शीतल तीर्थ रतलाम
रतलाम
रतलाम से 12 किलोमीटर दूरी पर स्थित शीतल तीर्थ रतलाम एक अलौकिक तीर्थ है यह पावन तीर्थ 18 भाषाओ के विद्वत ज्योतिष मार्तंड आचार्य श्री 108 महावीर कीर्ति जी महाराज की परंपरा के मासोपवासी तपस्वी आचार्य श्री सन्मति सागर महाराज से दीक्षित बालाचार्य संज्ञा से प्रसिद्ध परम पूज्य प्रज्ञा पुरुषोत्तम खंड विद्याधुरंधर आचार्य श्री योगेंद्र सागर महाराज के मन में मालवा की धर्म नगरी रतलाम से बांगड़ मेवाड़ की ओर विहार करने वाले जैन संतों को आहार निहार की सम्यक सुविधा उपलब्ध करवाने के भाव से रतलाम बांसवाड़ा मार्ग पर साधु सेवा एवं मानव सेवा को समर्पित एक तीर्थ के विकास का भाव आया।

पूज्य गुरुदेव की प्रेरणा मिली भक्तों ने 11 एकड़ का एक भूखंड रतलाम स्टेशन से लगभग 12 किलोमीटर दूर रतलाम सैलाना के मध्य राजमार्ग के समीप 2009 में लिया एवं 2001 में गठित नेशनल नॉन वायलेंस यूनिटी फाउंडेशन ट्रस्ट के नाम से इस भूमि की रजिस्ट्री करवाई। आपको बता दे यह एक पंजीकृत नों प्रॉफिटेबल ट्रस्ट ही शीतल तीर्थ की मातृ संस्था है।

एक स्मृति
14 जून 2009 एक बहुत ही बड़ी स्मृति है जिसे भक्त कभी नहीं भूल पाएंगे जी हां 14 जून का आचार्य श्री योगेंद्र सागर जी महाराज के जीवन में बहुत बड़ा महत्व रहा क्योंकि 14 जून 2009 को विधिवत भूमि पूजन कर इस तीर्थ की स्थापना की गई। गुरुवर की आस्था के केंद्र एवं परोक्ष आशीर्वाद प्रदाता पूर्वाचार्य श्री शीतलकीर्ति गुरुदेव की स्मृति में इसका नामकरण श्री दिगंबर जैन धर्म स्थल शीतल तीर्थ रखा गया।

 

इसे हम विधि का विधान कहें आचार्य श्री एक धरोहर हम सभी को दे गए निधि के रूप में दिए गए जो दिन धर्म की ध्वजा को पुलकित कर गए असाता वेदनीय कर्म के उदय से आचार्य श्री योगेंद्र सागर महाराज 18 मार्च 2012 को हम सबको छोड़कर सागवाड़ा में समाधिस्थ हो गए। लेकिन गुरुवर के प्रति भक्त समर्पित रहे एवं ब्रह्मचारिणी सविता दीदी के समर्पण उनकी सक्रियता से अब क्षेत्र पर 22 से 26 फरवरी 2024 के मध्य एक पंचकल्याणक मा महोत्सव का सहयोग बन रहा है। इसके बाद 26 से 28 फरवरी तक महामस्तकाभिषेक भव्य रूप से संपन्न होगा।
आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज एवं अनेक पिछी धारी संतों का मिल रहा है सानिध्य।

इस भव्य पंचकल्याणक महा महोत्सव को श्रमण परंपरा के आचार्य आध्यात्म योगी चर्या शिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज का सानिध्य 22 से 26 फरवरी 2024 में होने जा रहे इस पंचकल्याणक महा महोत्सव एवं उसके बाद होने जा रहे महा मस्तकाभिषेक महोत्सव को अपना सानिध्य प्रदान कर रहे हैं।

इस पंचकल्याणक की भव्यता इतनी अधिक होने वाली है कि यह राष्ट्रीय महोत्सव नहीं होकर अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव हो जाएगा इस महोत्सव की विशेष बात यह है कि आचार्य श्री संघ, एवं अन्य साधु संत जिसमें 50 से अधिक संतो का सानिध्य मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पूज्य आचार्य श्री का वर्ष 2023 का वर्षा योग बड़ोत उत्तर प्रदेश में संपन्न हुआ है। उसके उपरांत पूज्य गुरुदेव शीतल तीर्थ की ओर मंगल विहार कर रहे हैं। इस क्षेत्र में सक्रिय सहभागिता देते हुए इस क्षेत्र की अधिष्ठात्री ब्रह्मचारिणी सविता दीदी शीतल तीर्थ रतलाम जुटी हुई है। इस महा महोत्सव में प्रतिष्ठाचार्य के रूप में पंडित वृषभ सेन जैन मालगांव कर्नाटक, एवं सह प्रतिष्ठाचार्य पंडित विजय कुमार गांधी मंदसौर मध्य प्रदेश, पंडित नितिन जैन शास्त्री भीमपुर राजस्थान होंगे।

 

आपको बता दिन इस महोत्सव में पूरे देश के सारे भट्टारक भी मौजूद रहेंगे ऐसा बहुत कम जगह हुआ है।

अनुभव
दिनांक 20 जनवरी 2024 एवं 21 जनवरी 2024 को शीतल तीर्थ रतलाम में रहकर क्षेत्र का अवलोकन किया जहां आचार्य श्री योगेंद्र सागर जी महाराज के गुरु मंदिर के दर्शन किए उनकी प्रतिमा सजीव चित्रण प्रस्तुत कर रही थी मानो लग रहा था की गुरुदेव सभी को आशीर्वाद दे रहे हो। क्षेत्र की भव्यता प्राकृतिक सौंदर्य से भी भरपूर है। एवं यहां के दर्शन कर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार मन में होता है। क्षेत्र में ब्रह्मचारिणी सविता दीदी बहुत ही सक्रियता से इस क्षेत्र के लिए जुटी हुई है। इनका समर्पण इतना है कि इतनी उम्र के बावजूद भी कार्य को करने में लगी रहती हैं और क्षेत्र को एक नया आयाम दे रही है। आगामी होने वाले पंचकल्याणक महोत्सव के लिए भी यह संपूर्ण व्यवस्थाओं को देख रही हैं। उनका वात्सलय उनका स्नेह हम सभी को मिला। जब हमने ऊपर जाकर भगवान के दर्शन किए तो मानो लग रहा था कि एक अलौकिक तीर्थ की वंदना कर रहे हो।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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