गाजे-बाजे संग निकले चक्रवर्तीश्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव: राज्याभिषेक दीक्षा विधि संस्कार का भी मंचन ,रूपेश जैन की भजन संध्या संपन्न
सलूंबर
पंचकल्याणक महामहोत्सव का आज तीसरा तप कल्याणक दिवस है। 3 दिनों से आपने अत्यंत हर्ष और आनंद के साथ कार्यक्रमों का लाभ लिया। अभी आपने तीर्थंकर बालक के साथ देव परिवार के बालको की क्रीड़ा के दृश्य देखे। पुण्य और पाप में संसार लिप्त है अच्छे कार्यों से पुण्य का उपार्जन होता है ,प्रत्येक मानव के जीवन में हमेशा एक जैसा समय, पुरुषार्थ या परिणाम नहीं रहते हैं इसलिए गृहस्थ अवस्था में पुण्य का अर्जन करना चाहिए ।तीर्थंकर बालक 16 कारण भावना के बल पर संसार में अवतरित हुए हैं ,क्योंकि उन्होंने तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध किया ।तीर्थंकर बालक गर्भ में मतिज्ञान ,श्रुत ज्ञान और अवधि ज्ञान के साथ गर्भ में अवतरित होते हैं इसी कारण तीर्थंकर बालक की माता कठिन से कठिन गूढ प्रश्नों के उत्तर भी सरलता और सहजता के साथ देती है। यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने तप कल्याणक के तीसरे दिन धर्म सभा में प्रकट की ,
ब्रह्मचारी गजू भैय्या ,राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि वर्तमान में जो माता गर्भ धारण करती है उसे गर्भधारण करने पर क्या कार्य करना चाहिए क्या कार्य नहीं करना चाहिए यह विचारणीय प्रश्न है ।
आधुनिक डॉक्टर की सलाह पर बेड रेस्ट करती है जो की प्रमाद का कार्य होता है। विज्ञान के युग में नाना प्रकार के उपकरण मोबाइल, टीवी के माध्यम से गर्भवती माता जो कार्य करती है जो दृश्य देखते हैं वैसे संस्कार गर्भस्थ शिशु में होते हैं ।जैन शास्त्रों में स्वाध्याय कर बच्चों को संस्कारित करना चाहिए आज की गर्भवती माता देव पूजन , देव दर्शन तक नहीं करती है। जबकि प्रथमाचार्य आचार्य शांति सागर जी महाराज जब गर्भ में आए तो उनकी माता की भावना हुई कि मुझे 1008 पंखुड़ी वाले 108 कमल से जिनेंद्र भगवान की पूजन करनी है और उन्होंने भगवान की पूजन की। अर्जुन और अभिमन्यु की कहानी आप सभी ने सुनी है कि अर्जुन अपनी पत्नी को चक्रव्यूह में प्रवेश करने उसे भेदने की विधि बताता है तो उनकी पत्नी के साथ गर्भ में शिशु अभिमन्यु भी चक्रव्यूह में प्रवेश करने की विधि पूरी सुनता है जिस समय चक्रव्यूह से बाहर निकालने की विधि अर्जुन बता रहे थे तब माता पत्नी सो जाती है और पत्नी के साथ गर्भ में अभिमन्यु भी सो जाते हैं इस कारण वह बाहर निकालने की विधि नहीं जान पाते है और उनकी मृत्यु होती है यह एक उदाहरण है कि गर्भवती महिला जो कार्य देखती है ,करती है वैसे ही संस्कार बच्चों में होते हैं। अभी मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने आचार्य शांति सागर जी पर एक कविता सुनाई ।आचार्य शांति सागर जी महाराज ने अपने जीवन में श्रावक श्रमण परंपरा को जीवित किया उन्होंने जैन धर्म ,जिन मंदिरों पर आए उपसर्गों को अपने कठोर अन्न त्याग उपवास के माध्यम से दूर किया ।जिनवाणी जो नष्ट हो रही थी उसके संरक्षण के लिए उन्हें ताम्रपत्र पर अंकित कराया ।आज अगर आचार्य शांति सागर जी नहीं होते तो यह जिनालय नहीं दिखते ,हमारे संस्कृति नहीं होती और पंचकल्याणक महा महोत्सव, नूतन मंदिरों का निर्माण नही होता दिगंबर साधुओं के स्वतंत्र विहार भी नहीं होते। दीक्षा के बाद आहार दान राजा श्रेयांश ने पूर्व भव के जाती स्मरण के आधार पर मुनिराज को आहार देते हैं। पंचकल्याणक महोत्सव आमोद प्रमोद मनोरंजन के कार्य नहीं है ,इसमें आपको हर क्रिया को, साधु संतों के प्रवचन को सुनकर जीवन में पुण्य अर्जन करने का प्रयास करना चाहिए धर्म पुरुषार्थ से जीवन सुखी और मंगल मय बने ,तभी आपका मनुष्य जीवन सार्थक होगा। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी के मार्मिक प्रवचन हुए। मुनि श्री ने बताया कि पंच कल्याणक नर से नारायण ,कंकर से भगवान, बनाने का धार्मिक अनुष्ठान है 100 गर्भ कल्याणक देखने का पुण्य तीर्थंकर बालक के जन्म कल्याणक देखने से,1000 तप कल्याणक देखने का पुण्य एक ज्ञान कल्याणक से और 1000 ज्ञान कल्याणक देखने का पुण्य एक मोक्ष कल्याणक देखने से मिलता है वह दुर्भाग्यशाली है जो नगर में पांडाल में होते हुए पंच कल्याणक की क्रिया ,आचार्य साधुओं के प्रवचन नही श्रवण करते है।

आचार्य श्री शांति सागर सभागार का होगा शिलान्यासदिनेश ढालावत ने बताया कि चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी आचार्य पद शताब्दी महोत्सव के उपलक्ष्य में पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की प्रेरणा से जैन बोर्डिंग सलूंबर में प्रथमाचार्य श्री शांति सागर सभागार का शिलान्यास करने का समाज ने निर्णय लिया श्री दिगंबर बीसा नागदा समाज एवम पंच कल्याणक समिति की ओर से सकल दिगम्बर जैन समाज के सहयोग से आयोजित श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक महा महोत्सव के अवसर पर 23 जनवरी को भरत चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा निकाली गई। हाथी और बग्गियों पर चक्रवर्ती का परिवार सवार होकर शाही लवाजमे के साथ शोभायात्रा रवाना हुई ।
दिग्विजय यात्रा के वर्धमान सभागार पहुंचने पर वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में राज्याभिषेक व दीक्षाविधि संस्कार जयकारों के बीच किया गया।
श्री आदिनाथ मंदिर के श्रीमद जिनेन्द् पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के तीसरे दिन भरत चक्रवर्ती सूरजमल सिंघवी की दिग्विजय यात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। हाथी और बग्गियों में का परिवार सवार होकर रवाना हुआ। बैड की मधुर ध्वनियों के बीच निकली यात्रा के दौरान जैन समाज के लोगों ने नृत्य करते हुए खुशियां मनाई। भरत चक्रवर्ती सूरजमल सिंघवी परिवार का जगह-जगह जैन समाज के लोगों ने श्रीफल भेंटकर अभिनंदन किया। यात्रा नगर के प्रमुख रोड होते हुए अयोध्या नगरी वर्धमान सभागार पहुंचा। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में जयकारों के बीच भगवान के माता-पिता ने संहितासूरि पंडित हंसमुख जैन, पंडित भागचंद ,पंडित विशाल धरियावद के मंत्रोच्चार के बीच तीर्थंकर बालक का राज्याभिषेक करवाया गया। बाद में वैराग्य दर्शन व तीर्थंकर महाराज का गृह त्याग का मंचन किया गया। कार्यकारिणी सदस्य कन्हैयालाल सिंधवी एवं नितेश ढालालत हंसमुख गुनावत ने बताया कि आचायश्री के सान्निध्य में दीक्षा विधि संस्कार, तपकल्याणक पूजा व हवन का आयोजन किया गया। दीक्षा के दौरान पांडाल में मौजूद हजारों जैन समाज के लोगों ने श्री आदिनाथ महामुनि एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के जयकारों से गूंजा । आहारचर्चा के बाद अन्य कार्यक्रम अयोध्या नगरी में विभिन्न कार्यक्रम हुए। मणिलाल ,कमलेश ,गजेंद्र ने बताया कि जन्मकल्याणक के तहत प्रतिष्ठाचार्य संहितासूरि हंसमुख जैन के निर्देशन में प्रातः जिनाभिषेक एवं नित्यार्जन और बाल क्रीडा का आयोजन किया गया। वर्धमान सभागार में वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के मंचासीन होने के बाद चित्र अनावरण व दीप प्रज्ज्वलन परिवार ने किया। दिगम्बर जैन महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। शास्त्र भेंट व पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य को मिला। शास्त्र सभा के बाद प्रसिद्ध भजन गायक रूपेश जैन इंदौर की भजन संध्या में सुमधुर भजनों पर समाज द्वारा भक्ति नृत्य किया गया भजनों को सुनने के लिए जैन समाज के लोगों का सैलाब उमड़ा।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
