जीवन में सम्यक दर्शन और सम्यक दृष्टि का होना जरूरी-आचार्यश्री वर्धमान सागर जी

धर्म

जीवन में सम्यक दर्शन और सम्यक दृष्टि का होना जरूरी-आचार्यश्री वर्धमान सागर जी

श्री आदिनाथ जिनालय बीसा नागदा,एवम् दशा हूमड, श्री शीतलनाथ जिनालय बीसा नागदा,श्री शांतिनाथ जिनालय रूपगिरी, श्री नेमीनाथ जिनालय बीसा नरसिंहपुरा, श्री पार्श्वनाथ जिनालय दशा नरसिंहपूराश्री महावीर जिनालय बीसा हूमड सहित अनेक निजी चेत्यालय की नगरी सलूंबर के जैन बोर्डिंग भवन में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने प्रातः कालीन धर्म सभा में उपस्थित श्रावकों से कहा कि जीवन में सम्यक दर्शन और सम्यक दृष्टि का होना बहुत आवश्यक है। सम्यक दर्शन या सम्यक दृष्टि की प्राप्ति करने के लिए व्यक्ति को धर्म धारण करके तप पूजा और साधना करनी पड़ती है। लेकिन व्यक्ति ऐसा कर नहीं पता है। सांसारिक जीवन में जो 25 दोष माने गए हैं वो सम्यक दर्शन को मलिन करते हैं। लेकिन व्यक्ति उनके ही बहुत निकट रहता है। उन्हें छोड़ नहीं पाता है। भगवान ने जैसा स्वरूप बताया है, या जैसा स्वरूप चला आ रहा है वैसा का वैसा या ठीक उसी प्रकार से सिद्धांत करना ही सम्यक दर्शन कहलाता है।ब्रह्मचारी गजू भैय्या राजेश पंचोलिया प्रभुलाल दोषी अनुसार आचार्यश्री ने कहा कि सांसारिक प्राणी तप, साधना, धर्म ध्यान करता जरूर है लेकिन वह उन 25 दोषों को नहीं छोड़ पाता है जो सम्यक दर्शन को मलिन करते हैं। वह हर समय उन्हें पालकर रखता है। सम्यक दर्शन के जो गुण हैं उनकी तरफ हमारी दृष्टि बहुत ही कम जाती है, या यूं कहें कि उधर हमारी दृष्टि जाती ही नहीं है। सम्यक दृष्टि व्यक्ति ही उस पर दृष्टिपात करता है और अपने सम्यक दर्शन को शुद्ध करता है, और अपने जीवन को निर्मल बनाता है। वैराग्य की भावना हमें संसार से विरक्ति प्रदान करती है। लेकिन उस भावना को केवल हम सुन लेते हैं, देख लेते हैं या उनका पठन कर लेते हैं। लेकिन उन भावनाओं को अपने जीवन में नहीं उतारते हैं। पढ़ना अलग बात है और पढ़ कर उसे अपने जीवन में उतरना अलग बात है। आचार्यश्री ने कहा कि पढ़ता तो बच्चा भी है। स्कूल में कॉलेज में आजकल पढ़ाई की कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन आगे वहीं बढ़ पाता है जो पढ़कर के उस पर विचार करता है और अपने जीवन में उतरता है। आजकल पढ़ लिखकर कितने ही डॉक्टर बन गए हैं। देश में डॉक्टरों की कोई कमी नहीं है। कमी है तो केवल आत्मा के डॉक्टर की और धर्म के डॉक्टर की। हम कुछ भी काम करें लेकिन हमारी सम्यक दृष्टि नहीं बदलना चाहिए। सम्यक तो वह तत्व है जिसके कारण हम जीवन में आत्मा शुद्ध कर सकते हैं हमारे जीवन को निर्मल बनाकर सिद्धत्व को प्राप्त कर सकते हैं। सेठ लक्ष्मीलाल, मणिलाल दिनेश चंद अनुसार 21 जनवरी से 25 जनवरी 2024 तक जिन बिंब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा हेतु युद्ध स्तर पर पंडाल का कार्य लगभग पूर्ण हो गया है। समाज द्वारा नगर सलूंबर में सभी प्रशासनिक अधिकारियों को निमंत्रण प्रत्रिका दी गई हैं।निकट के नगरों में भी आमंत्रण घर घर जाकर दिए गए। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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