अयोध्या की भूमि शाश्वत भूमि है भगवान राम के जन्म के साथ पांच तीर्थंकरों के जन्म की जन्म भूमि जो कभी नष्ट नही होगी।

धर्म

अयोध्या की भूमि शाश्वत भूमि है भगवान राम के जन्म के साथ पांच तीर्थंकरों के जन्म की जन्म भूमि जो कभी नष्ट नही होगी।
अयोध्या
सरयू का पावन किनारा
लगे सबको प्यारा प्यारा
जो है चार तीर्थंकरों की जन्म भूमि के साथ प्रभु श्री राम की जन्म भूमि का द्वारा

 

 


जिसका कण कण पावन वह अयोध्या तीर्थ हमारा
अयोध्या की भूमि के विषय में जितना कहा जाए उस पर बहुत विस्तार से लिखा जा सकता है।

 

आज अयोध्या की चर्चा संपूर्ण विश्व में हो रही है और होना भी चाहिए क्योंकि श्री राम का मंदिर जो बनने जा रहा है और उसकी प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है यह अपने आप में भारत का गौरव है और यह भारत का मस्तक ऊंचा करने वाला कार्य हो रहा है। लेकिन अयोध्या के विषय में आप यह जानते हैं कि अयोध्या एक शाश्वत भूमि है।

अयोध्या तीर्थ का महत्व श्री राम की जन्म भूमि के साथ जैन दर्शन में भी अयोध्या का महत्व बताया गया है अयोध्या में श्री राम के साथ तीर्थंकर आदिनाथ भगवान,अजीतनाथ भगवान, संभवनाथ भगवान, सुमतीनाथ अनंतनाथ भगवान की यह जन्मभूमि है।

 

जैन दर्शन में अयोध्या को शाश्वत भूमि कहा जाता है शाश्वत भूमि का अर्थ होता है कि जहां भगवान ने जन्म लिया है, और निर्वाण को प्राप्त किया है। उसे शाश्वत तीर्थ कहा जाता है। इसीलिए अयोध्या भी शाश्वत भूमि है।

हर एक व्यक्ति इस माटी का वंदन करना चाहता है। अयोध्या के विषय में बताते हुए पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधा सागर महाराज ने इसके बारे में व्याख्या करते हुए बताया था कि भारत में कुछ स्थान ऐसे होते हैं जिन्हें हम ऐतिहासिक भी नहीं कह सकते, बल्कि हम उन्हें सृष्टि के साथ जोड़ सकते हैं। सृष्टि ऐतिहासिक नहीं होती सृष्टि शाश्वत हुआ करती है।

 

 

 

महाराज श्री बताते हैं कि भारत का ऐसा कोई दर्शन नहीं होगा जिसका संबंध अयोध्या से ना रहा हो। एक रोचक जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अयोध्या भारत का एक ऐसा स्थान है जो प्रलय के बाद भी कभी नष्ट नहीं होता। जैन पुराणों में इसका विशेष उल्लेख मिलता है। अयोध्या का एक अलग ही इतिहास जैन पुराणों में जैन ग्रंथो में देखने को मिलता है, जितने भी तीर्थंकर अनंत काल में जन्म लेते हैं, वह अयोध्या में ही जन्म लेते हैं और सम्मेद शिखर तीर्थ से निर्वाण को प्राप्त करते हैं।

महाराज श्री ने अयोध्या के विषय में और भी कुछ बताया जो आज की परिपेक्ष में सभी को ज्ञात होना चाहिए सृष्टि पर प्रलय आएगा और सब कुछ नष्ट हो जाएगा, लेकिन जब प्रलय आएगा, लेकिन तब बचेगा अयोध्या का स्थान। अयोध्या के नीचे एक स्वर्णमई नंध्यावृत्त है। जब आकाश से आग और पृथ्वी बरसेगी सब स्वाहा हो जाएगा। तब स्वर्णमई नंध्यावृत्त निकाल कर आएगा जो अयोध्या के बीच में है। यह निकालकर ऊपर आएगा। इस समय देवता आकर इस स्वर्णमई नंध्यावृत्त की पूजा करेंगे, और जैसे ही इसकी पूजा होगी, वैसे ही सृष्टि से प्रलय खत्म होगा। और पुनः मानव संरचना शुरू होगी। निश्चित रूप से अयोध्या तो वैसे ही हम सब भारतवासियों के लोगों का प्राण है। अयोध्या ने तो काफी उपसर्ग झेले है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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