मानव को अपध्यान से बचना चाहिए-गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी-
अतिशय क्षेत्र स्वस्तिधाम जहाजपुर की झांकी देखने उमड़े श्रद्धालु
जयपुर
-पापों में मन सहजता से एकाग्र हो जाता है। उदाहरण देते हुए माताजी ने कहा कि मोबाइल देखने में समय बीतने का पता नहीं चलता है,उसी प्रकार टीवी पर सीरियल देखते समय मच्छर काटने का भी पता नहीं चलता है।, ये सब अपध्यान के कारण है। इससे मनुष्य को बचना चाहिए।

ये कथन गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में गुरुवार को आयोजित धर्म सभा में व्यक्त किए।
माताजी ने बताया कि अन्य आचार्यों ने अपध्यान के बारे रत्नकरंड श्रावकाचार में कहां है कि जिन शासन में चतुर पुरुष,राग से अथवा द्वेष से अन्य की स्त्री आदि के नाश होने,कैद होने,कट जाने आदि के चिंतन को अपध्यान कहते हैं।इसी प्रकार सर्वार्थ सिद्धि ग्रन्थ में कहा है कि दूसरों का जय,पराजय,मारना,बांधना, अंगों का छेदना,धन का अपहरण आदि को अपध्यान की श्रेणी में माना गया है।
कार्तिकेयानुप्रेक्षा ग्रन्थ में पर के दोषों को ग्रहण करना,पर की लक्ष्मी को चाहना,परायी स्त्री को ताकना,पराये कलह को देखना भी अपध्यान है।
द्रव्य संग्रह में बताया गया है कि स्वयं विषयों के अनुभव से रहित भी यह जीव अन्य को देखें हुए तथा सुने हुए विषय को , अनुभव को मन से स्मरण करके विषयों की इच्छा करना भी अपध्यान है। इनसे मनुष्य को बचना चाहिए। इससे पूर्व प्रियंका दीदी द्वारा मंगलाचरण किया गया।अतिथियों द्वाराचित्र अनावरण,दीप प्रज्जवलन किया गया।
*झांकी देखने उमड़े श्रद्धालु*
माताजी ससंघ के सानिध्य में पदमपुरा में श्री मुनिसुव्रत नाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र स्वस्तिधाम जहाजपुर की सजाई गई झांकी देखने के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।मुख्य समन्वयक रमेश ठोलिया एवं उपाध्यक्ष विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने बताया कि श्रद्धालुओं के अवलोकन के लिए झांकी प्रातः 7.00 बजे से रात्रि 9.00बजे तक खुली है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
