84 लाख मंत्रो का अधिपति है णमोकार महामंत्र मुनि श्री विमल सागर महाराज
तलवाड़ा
परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री 108 विमल सागर महाराज ने तलवाड़ा मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए णमोकार मंत्र की महिमा को बताया।
उन्होंने कहा कि णमोकार मंत्र की महिमा अपरंपार है। विश्वास ही परम मंत्र है, विश्वास से ही कार्य की सिद्धि होती है। करोड़ पाप करने वाले इस पांच नमस्कार मंत्र की आराधना से संसार से पर हो गए। अपार है इस मंत्र की महिमा।

एक उदाहरण के माध्यम से बताया कि मंत्र के प्रभाव से सेठ ने वस्त्र आभूषण प्रदान किए। जो अमीर खजाने का त्याग करते हैं वही साधु बन पाते हैं। विश्वास का नाम ही जीवन है। अंतिम सांस णमोकार मंत्र की जब से ली तो जीवन सफल हो जाता है। 84 लाख मंत्रो का अधिपति है णमोकार महामंत्र।
णमोकार महामंत्र के माध्यम से ध्यान भी होता है। मंत्रो का एक-एक अक्षर पाप का नाश करने वाला है। जो प्रतिदिन महामंत्र की माला से आराधना करता है उसका क्या कहना है, यह महिमाशाली है।


धर्म सभा को पूज्य मुनि श्री भावसागर महाराज ने भी संबोधित किया और तलवाड़ा जैन मंदिर की विशेषता को बताया उन्होंने कहा कि यहां का मंदिर देखकर लगता है। यहां का मंदिर जैसे कोई तीर्थ हो। प्रभु का कार्यों या परोपकार का कार्य हो। उसके लिए जो दान दिया जाता है वह अर्पित किया जाता है। फिर उसे धन संपत्ति का उपयोग नहीं करना चाहिए। दान देने से व्यक्ति भगवान और महान बनता है। दान देने से शत्रुता का नाश होता है। दान बोलकर नहीं देने से बीमारियां होती हैं, परेशानी आती है।
पूर्वजों ने जो मंदिर बने हैं हम उनकी सुरक्षा कर रहे हैं। यह महत्वपूर्ण कार्य है दान देने से सम्मान बढ़ता है। पूरी दुनिया में प्रसिद्धि फैलती है। घर से जो शुद्ध पूजन की सामग्री लाता है उससे विशेष पुण्य अर्जन होता है। उन्होंने कहा जब भरत चक्रवती पूजन करते थे, तो द्रव्य के पहाड़ बन जाते थे। प्रभु की स्वर्ण और रतन से पूजन करना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
