61 दिवसीय णमोकार महामंत्र अनुष्ठान मुनि श्री संकल्प सागर महाराज संघ सानिध्य में 5 जुलाई से हुआ प्रारंभ

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61 दिवसीय णमोकार महामंत्र अनुष्ठान मुनि श्री संकल्प सागर महाराज संघ सानिध्य में 5 जुलाई से हुआ प्रारंभ
अजमेर
णमोकार महामंत्र अनुष्ठान कष्टों का निवारण दुखों से छुटकारा और प्रभुता से मिलवाने का माध्यम है इसी मंगल कामना को लेकर विद्यासागर तपोवन छतरी योजना में 61 दिवसीय णमोकार महामंत्र अनुष्ठान 5 जुलाई को प्रारंभ हो गया था जैन संस्कृति, जैन आगम का सबसे बड़ा मंत्र जिसे महामंत्र भी कहा जाता है णमोकार महामंत्र कहलाता है।

 

णमोकार मंत्र की जानकारी
णमोकार मंत्र का जैन दर्शन में बड़ा महत्व है। जैन परिवार में जन्म लेने वाले को जन्म लेते ही प्रारंभ में णमोकार महामंत्र सुनाया जाता है। और जीवन के अंतिम क्षण में भी णमोकार मंत्र सुनाया जाता है। उठते बैठते सोते जगते जैन धर्मावलंबी णमोकार महामंत्र का जाप करते हैं।

णमोकार महामंत्र का जाप करने से अनेक व्याधियों का नाश होता है कर्मों की निर्जरा होती है बिगड़े हुए काम बन जाते हैं। विश्व शांति की कामना एवं रोग शोक व्याधि का नाश हो इस हेतु दिगंबर जैन मुनि संघ सेवा जागृति मंच के तत्वाधान में णमोकार महामंत्र अनुष्ठान चल रहा है। जो 61 दिन तक चलेगा। मिली जानकारी अनुसार प्रतिदिन एक परिवार पुण्यार्जक इस पन्ने कार्य में आगे आकर इस आयोजन के मंगल कलश की स्थापना करता है। और यह अनुष्ठान चलता है। मुनि श्री 108 संकल्प सागर जी महाराज, एवं मुनि श्री 108 सद्भाव सागर जी महाराज के सानिध्य में 61 दिवसीय अनुष्ठान में समस्त अजमेर वासी भक्ति में सराबोर होकर इसका लाभ ले रहे हैं एवं अपने कर्मों की निर्जरा कर रहे है। आयोजन के क्रम में प्रतिदिन प्रातः 6:45 बजे आदिनाथ भगवान की अभिषेक शांतिधारा उसके पश्चात 8:15 मुनि श्री के प्रवचन और संध्या काल में 6:30 बजे प्रारंभ हो जाता है मुनि श्री सद्भाव सागर जी महाराज णमोकार महामंत्र चालीसा से इसका प्रारंभ करते हैं, उसके पश्चात दो माला जाप णमोकार की भक्ति संगीत के साथ सभी श्रावक करते हैं।णमोकार महामंत्र को 84 लाख मंत्रों का राजा भी कहा जाता है जैन संस्कृति में 3 साल के बालक को भी णमोकार महामंत्र बोलना सिखाया जाता है
णमोकार महामंत्र के लिए कहा जाता है कि संसार रूपी महा पर्वत को भेजने के लिए वज्र के समान है।

 

एक तराजू में णमोकार महामंत्र और दूसरी तराजू में अनंत गुण फिर भी णमोकार महामंत्र का पलड़ा भारी रहेगा ऐसा आचार्य उमा स्वामी जी ने शास्त्रों में लिखा है।आचार्य पुष्पदंत भूतबली स्वामी ने षष्ठखंडागम
ग्रंथ में णमोकार महामंत्र को ब मंगलाचरण के रूप में लिपिबद्ध किया।

णमोकार महामंत्र अनुष्ठान आयोजन के अंत में प्रतिदिन पांच प्रश्न आयोजक मंडल के द्वारा पूछे जाते हैं उन प्रश्नों के सही जवाब देने वालों को पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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