भारतीय जीवन में संस्कारों का बड़ा महत्व है विज्ञा श्री माताजी
गुन्सी
प. पू. भारत गौरव श्रमणी गणिनी आर्यिकारत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ने श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ गुन्सी जिला – टोंक (राज. ) में सभी को धर्मोपदेश देते हुए कहा कि –
जीवन के साथ संस्कारों का घनिष्ठ सम्बन्ध है और भारतीय जीवन में संस्कारों का बड़ा महत्त्व है । वास्तव में संस्कृति शब्द संस्कार से बना है । इसका अर्थ है-परिमार्जित, परिकृत, सुधारा हुआ, ठीक किया हुआ । इन अर्थो में मानव में जो दोष हैं, उनका शोधन करने के लिए, उन्हें सुसंस्कृत करने के लिए ही संस्कारों का प्रावधान किया हुआ है !

संस्कारों के द्वारा मानवीय मन को एक विशिष्ट वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर निर्मल, सन्तुलित एवं सुसंस्कृत बनाया जाता है । जीवन में काम आने वाले सत्यवृत्तियों का बीजारोपण भी इन संस्कारों के समय होता है । यदि किसी बालक के सभी संस्कार ठीक रीति से समुचित वातावरण में किये जायें, तो उसका व्यक्तित्व सुविकसित होता है । संस्कार पद्धति के द्वारा उसके मनोविकारों का निराकरण कर उसकी सृजनात्मक शक्ति को बढ़ावा देता है । अत: जीवन की बहुमूल्य विशिष्टता, सम्पदा और चरित्र निर्माण का आधार संस्कार है ।
संस्कारों का महत्त्व:



मानव जीवन में संस्कारों का अत्यधिक महत्त्व है । संस्कारों का सर्वाधिक महत्त्व मानवीय चित्त की शुद्धि के लिए है । संस्कारों के द्वारा ही मनुष्य का चरित्र निर्माण होता है और विचारों के अनुरूप संस्कार; क्योंकि चरित्र ही वह धुरी है, जिस पर मनुष्य का जीवन सुख, शान्ति और मान-सम्मान को प्राप्त करता है । संस्कार के द्वारा मानव चरित्र में सदगुणों का संचार होता है, दोष, दुर्गुण दूर होते हैं । मानव जीवन को जन्म से लेकर मृत्यु तक सार्थक बनाने तथा सत्य-शोधन की अभिनव व्यवस्था का नाम सरकार है । संस्कारों का मूल प्रयोजन आध्यात्मिक भी है तथा नैतिक विकास का भी है; क्योंकि मानव जीवन को अपवित्र एवं उत्कृष्ट बनाने वाले आध्यात्मिक उपचार का नाम सस्कार है । श्रेष्ठ संस्कारवान मानव का निर्माण ही संस्कारों का मुख्य उद्देश्य है । संस्कारों के द्वारा ही मनुष्य में शिष्टाचरण एवं सभ्य आचरण की प्रवृत्ति का विकास होता है । इस अर्थ में सर्वसाधारण के मानसिक, चारित्रिक एवं भावनात्मक विकास के लिए सर्वाग सुन्दर विधान संस्कारों का है ।
क्षेत्र कमेटी द्वारा
आगामी 10 दिसम्बर 2023 को होने वाले पिच्छिका परिवर्तन एवं 108 फीट उत्तुंग कलशाकार सहस्रकूट जिनालय के भव्य शुभारम्भ में सम्मिलित होकर इस सुअवसर में साक्षी बनकर पुण्यार्जन करने का निवेदन कर रही है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
