आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने इस भारत देश को कहीं उपकारों से उपकृत किया है विनम्र सागर महाराज
बंधाजी
शनिवार की बेला में अतिशय क्षेत्र बंधाजी पूज्य मुनि श्री विनम्र सागर महाराज संघ समिति में 1500 पूर्णमासी कलश स्थापित किए गए।
श्री जी के अभिषेक शांतिधारा उपरांत नित्य नियम पूजन के साथ पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का पूजन किया गया एवं आचार्य श्री का अवतरण दिवस मनाया गया इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री विनम्र सागर महाराज ने आचार्य श्री के जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला और उन्होंने बताया कि आचार्य श्री का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को शरद पूर्णिमा के दिन सदलगा कर्नाटक में हुआ। और आचार्य श्री को 30 जून 1968 को अजमेर में पूज्य आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज द्वारा 22 वर्ष की उम्र में मुनि दीक्षा प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि पूज्य आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज ने 22 नवंबर 1972 को पूज्य मुनि श्री विद्यासागर महाराज को अपना आचार्य पद प्रदान किया।
पूज्य महाराज श्री ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के प्रति अपने भाव प्रकट करते हुए कहा कि शरद पूर्णिमा के दिन आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का अवतरण हुआ था। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने कई उपकारों से इस देश को उपकृत किया है। आचार्य श्री ने गौशालाएं खुलवाकर लाखों पशुओं को जीवन जीने का अधिकार दिया है।




इसी के साथ कई अस्पताल खुला कर और रोगियों को निरोग बनाया है। एवं पाषाण के कई मंदिरों को बनवाकर जैन संस्कृति को सुरक्षित एवं संरक्षित करने का काम किया है।
महाराज श्री ने अतिशय क्षेत्र बंधाजी के विषय में कहा कि अजित नाथ भगवान का आतिशय आप लोग देख रहे होंगे। 1100 साल पहले सूर्य मंत्र देकर पाषाण से भगवान बनाया होगा। इनका जो आभामंडल है वह गृहस्थो के नक्षत्रों को बदलने वाला है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
