हे शरद पूर्णिमा के पूर्ण चन्द्र तुम्हे शत शत नमन
शरद पूर्णिमा जो की शरद ऋतु के उन्नयन की घोतक है। हल्की ठंड का आगाज तो शारदीय नवरात्रि से ही हो जाता है किंतु शरद पूर्णिमा के साथ ही यह शीत ऋतु उन्नति यानी कि आगे की ओर अग्रसर होने लगती है।

और धीरे-धीरे उत्तर भारत को अपने आगोश में ले लेती है इसी शरद पूर्णिमा पर जैन धर्म के उन्नयन हेतु पूर्ण चन्द्र के रूप में दो महान विभूतियों इस धरा पर अवतरित होकर हम सबको कृतार्थ किया है।




ऐसे परम प्रतापी, परम पूज्य, वर्तमान के वर्धमान,सर्वाधिक दीक्षा प्रदाता,मूक माटी ग्रन्थ के रचयिता *आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज* जिन्होंने जैनत्व को एक नया आयाम दिया और दूसरी महान विभूति *परम पूज्य विदुषी गणिनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी* जिन्होंने नई ऊंचाइयों के साथ एक ऐसी अद्भुत रचना को साकार रूप दिया, जिसे युगों युगों तक याद किया जाता रहेगा।
मांगी तुंगी सिद्ध क्षेत्र की रचना और जम्बू दीप हस्तिनापुर के साथ-साथ अयोध्या के विकास की नई कहानी माता जी के सानिध्य में लिखी जा रही है ऐसे दोनों पूज्य संतों के श्री चरणों में शरद पूर्णिमा के पावन दिन अवतरण दिवस पर शत-शत नमन।
*संजय जैन बड़जात्या कामां*
