अन्तर्मना का 557 दिन की मौन साधना के बाद उदगांव में वसंत व्रत ग्रहण कर 40 दिन की मौन साधना प्रारंभ अमूल्य सम्बन्धों की तुलना कभी पैसों से मत करो आचार्य श्री

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अन्तर्मना का 557 दिन की मौन साधना के बाद उदगांव में वसंत व्रत ग्रहण कर 40 दिन की मौन साधना प्रारंभ अमूल्य सम्बन्धों की तुलना कभी पैसों से मत करो आचार्य श्री
उदगाव (महाराष्ट्र)-
परम पूज्य प्रातः स्मरणीय अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज ने तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की समाधि स्थली कुंजव नउदगाव महाराष्ट में वर्षा योग 2023 संपन्न होने जा रहा है।

 

 

 

आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज ने एक ओर उत्कृष्ट तपस्या का व्रत लिया है। पूज्य आचार्य श्री उत्कृष्ट तप साधना कर अपने जीवन को मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ा रहे है।

पूज्य श्री ने 26 अक्टूबर से 40 दिन की मौन उपवास के साथ साधना को प्रारंभ किया है। इस तप साधना में 5 आहार का बसंत व्रत संकल्प लेकर अपनी तपस्या को ओर प्रगाढ़ बना रहे है।ये उत्कृष्ट तपस्या 26 अक्टूबर 2023 से 4 दिसम्बर 2023 तक होगी। ओर 4 दिसंबर को महापारणा उदगाव में होगा ।

मीडिया प्रभारी राजकुमार अजमेरा कोडरमा ने बताया कि इस अवसर पर अन्तर्मना ने कहा कि पैसा बोलता है !!
अमूल्य सम्बन्धों की तुलना कभी पैसों से मत करो,क्योंकि पैसा दो दिन , काम आयेगा परन्तु रिश्ते जिन्दगी भर साथ निभायेंगे। सम्बन्धों की ये तीन चीज हत्यारी (बिगाड़ने) वाली है।

जर, जोरू और जमीन… पैसा एक, नाम अनेक ,मंदिर में दिया जाए तो चढ़ावा,स्कूल में दिया जाए तो फीस,
शादी में दो तो दहेज, तलाक देने पर गुजारा भत्ता ,आप किसी को देते हो तो कर्ज , अदालत में दे तो जुर्माना, सरकार लेती है तो कर (टेक्स)। सेवानिवृत्त होने पर पेंशन।

अपहरण कर्ताओं के लिए फिरौती ,
होटल में सेवा के लिए टिप ,
बैंक से उधार लो तो ऋण, मजदूरों को दो तो वेतन , अवैध रूप से प्राप्त सेवा रिश्वत और मुझे दोगे तो गिफ्ट,
पैसा नमक की तरह है जो जरूरी तो है मगर जरूरत से ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है।पैसा मरने के बाद आप अपने साथ नहीं ले जा सकते लेकिन जीते जी पैसा आपको बहुत ऊपर ले जा सकता है। सिकन्दर से भी ज्यादा पैसा जोड़ों लेकिन जब छोड़ने का वक्त आये तो ऐसा छोड़ो जैसे-भगवान महावीर की तरह, तन पर एक धागा भी ना रहे।

 

धन को अग्नि में डालो तो वह राख हो जायेगा (संसार की वस्तुएं नष्ट हो जायेंगी) और यदि धन को धर्म, मानव सेवा, परोपकार में लगाओ तो वह अक्षय खजाना बन जायेगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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