धर्म कार्य हो या अर्थाजन पुरूषार्थ सबमें जरूरी: आचार्यश्री वर्धमानसागरजी

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धर्म कार्य हो या अर्थाजन पुरूषार्थ सबमें जरूरी: आचार्यश्री वर्धमानसागरजी
उदयपुर

हूमड भवन में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने प्रात: कालीन धर्म सभा में उपस्थित श्रावकों से जीवन में किए जाने वाले विभिन्न पुरुषार्थों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि धर्म पुरुषार्थ को इसलिए बड़ा माना गया है क्योंकि धर्म पुरुषार्थ के बाद ही मोक्ष पुरूषार्थ प्राप्त किया जा सकता है। सद्गृहस्थियों के लिए अर्थ पुरुषार्थ जरूरी है। इसमें कोई दो राय नहीं। क्योंकि बिना अर्थ और धन के ना तो दान पुण्य के कार्य हो सकते हैं और ना ही कोई धर्म कार्य संपादित किए जा सकते हैं। लेकिन यह कहना भी उचित नहीं होगा की दान पुण्य और धर्म कार्यों के लिए धन ही महत्वपूर्ण है। जीवन में धर्म धारण करने से भी धर्म के कार्य संपादित हो सकते हैं। अगर आपके पास विद्या है तो उसका दान करके भी आप दान पुण्य का पुरुषार्थ प्राप्त कर सकते हैं।शांतिलाल वेलावत,पारस चितोड़ा,सुरेश पद्मावत अनुसार आचार्यश्री ने कहा कि हमारे शास्त्रों में धन का उपयोग कैसे करना चाहिए कब करना चाहिए इसके बारे में भी विस्तार से बताया गया है। बिना द्रव्य और बिना धन के कोई भी काम करना संभव नहीं हो पाता है। चाहे राष्ट्र की रक्षा की बात हो या धर्म की रक्षा की बात दोनों में धन की आवश्यकता जरूरी होती है। राष्ट्र की रक्षा करने का तो हर राष्ट्र भक्त का कर्तव्य होता है। लेकिन धर्म का दायरा सीमित होता है। दुनिया में अलग-अलग धर्म है उनके मानने वालों की संख्या भी सीमित होती है। ऐसे में धर्म की रक्षा के लिए जहां अर्थ की आवश्यकता होती है वही धर्म धारण करना भी जरूरी हो जाता है। लेकिन बिना पुरुषार्थ के ना तो धन प्राप्त किया जा सकता है और नहीं धर्म धारण किया जा सकता है। आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य जीवन में आरोग्य सबसे बड़ा धन माना गया है। लेकिन आरोग्य के लिए भी पुरुषार्थ करना पड़ता है। हमारे शास्त्रों में भी आरोग्य प्राप्ति के कई उपाय बताए गए हैं। क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए कब खाना चाहिए। संकट के समय कई बार धन की जगह बुद्धि काम आती है क्योंकि यह बुद्धि ही विवेक को जागृत कर के हमें उस संकट से बचने का पुरुषार्थ देती है।

 

 

अश्विन शुक्ल विजया दशमी कोआचार्य श्री वर्धमान सागर जी से विभिन्न वर्षो में दीक्षित मुनिराज एवम् आर्यिका माताजी के दीक्षा दिवस पर चांदन पर श्री महावीर विधान का आयोजन प्रातः 7 बजे हूमड़ भवन में किया गया है।

 

श्री हितेंद्र सागर जी,मुनि श्री क्षेम सागर जी,श्री अतिशय सागर जी, श्री भविक सागर जी,उदयपुर गौरव मुनि श्री प्रशम सागर जी, आर्यिका श्री क्षीर मति जी, प्रथम दीक्षा वर्ष आ श्री निर्मोह मती जी,आ श्री विश्वयश मती जी,आ श्री पद्मयश मती जी एवम आ श्री दिव्य यश मति जी का दीक्षा दिवस है इस अवसर पर अनेक नगरों से भक्त आए हैं। सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा आचार्य श्री शांति सागर जी के आचार्य पद के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में
चारित्र चक्रवती सुर संगम प्रतियोगिता की फाइनल प्रस्तुति
सुखाडिया रंगमंच नगर निगम टाउन हाल में आयोजित है।
राजेश पंचौलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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