ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी दीक्षा पश्चात आर्यिका105 योगीमति माताजी

धर्म

ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी दीक्षा पश्चात आर्यिका105 योगीमति माताजी
उदयपुर
वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री 108वर्धमान सागर जी महाराज वे संयम वर्ष में अभी तक 106 भव्य दीक्षा पूर्व में दी।

 

आज आचार्य श्री द्वारा 65 वर्षीय ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी का आर्यिका दीक्षा के संस्कार किए।उसके बाद उनका नूतन नाम आर्यिका105 श्री योगीमती माताजी किया गया।

 

 

मेवाड़ की वीर भूमि झीलों की नगरी उदयपुर जो कि धर्म नगरी के रूप में विख्यात है ।उदयपुर में 50 से अधिक दिगंबर जैन मंदिर है दिगंबर जैन समाज की दृष्टि से अभी तक विगत वर्षों में दिगंबर समाज के विभिन्न आचार्याओं ने विगत वर्षों में 50 से अधिक दीक्षाएं दी है ।प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा की पंचम पट्टाधीश आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागर जी 31 साधुओं के विशाल संघ सहित अप्रैल 2023 से उदयपुर में विराजित होकर 55 वा वर्षा योग कर रहे हैं ।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अपने सिद्ध हस्त कर कमल से अभी तक विगत वर्षों सहित कुल 106 भव्य जीवो को दीक्षा देकर मोक्ष मार्ग प्रशस्त किया है ।

 

 

 

 

65 वर्षीय मंजू दीदी जो की आचार्य संघ में विगत 39 वर्षों से ब्रह्मचारिणी दीदी हैं ,आज आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उन्हें आर्यिका दीक्षा देकर नूतन नाम आर्यिका 105 श्री योगीमतिमाताजी किया।

 

नूतन नामकरण के पश्चात संपूर्ण पंडाल में हर्ष व्याप्त हुआ सभी ने करतल ध्वनि से स्वागत किया ।पंडाल आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की जय जय कार से गुंजायमान हो गया । शांति लाल वेलावत पारस चितोड़ा सुरेश पद्मावत अनुसार सकल दिगंबर जैन समाज उदयपुर के तत्वाधान में भव्य दीक्षा समारोह 20 अक्टूबर को आयोजित किया गया ।इसके पूर्व प्रात 5:00 बजे ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी के केशलोचन प्रारंभ हुए ।वैराग्य के दृश्य को देखकर सभी हर्षित एवं द्रवित रहे। परिजनों के एक नेत्र में खुशी के आंसू दूसरे नेत्र में दुख भी झलक रहा था संघस्थ आर्यिका माताजी, ब्रह्मचारिणी पूजा दीदी के भजनों ने वातावरण को वैराग्य मय बना दिया । इसके पश्चात मंजू दीदी का मंगल स्नान बाद शोभायात्रा बीसा हूमड़ भवन पंडाल पहुंची जहां पर मंजू दीदी ने 108 कलश से श्री जी का अभिषेक किया ।दीक्षा कार्यक्रम में मंगलाचरण ने प्रस्तुत किया नृत्य मंगलाचरण के द्वारा प्रस्तुत किया गया । पूर्वाचार्यों के चित्र का अनावरण कर दीप प्रवज्जलन के द्वारा किया गया पूर्वाचार्य एवं आचार्य श्री को अर्घ समर्पण के द्वारा किया गया।

 

सौभाग्यशाली महिलाओं द्वारा मंगल अक्षतों से चौक पूरने का कार्य किया । दीक्षार्थी मंजू दीदी ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को श्रीफल बैठकर पुनःदीक्षा की याचना कर आचार्य श्री, संघस्थ समस्त मुनिराज , आर्यिका माताजी क्षुल्लक जी संघस्थ भैया दीदी समाज जन से क्षमा याचना की। आचार्य श्री ने संघ के सभी मुनिराजो,आर्यिका माताजी,क्षुल्लक समाज, परिजनों
से दीक्षा बाबत आपत्ति सहमति ली ।सभी ने हाथ जोड़कर दीक्षा की अनुमोदना करतल ध्वनि से की ।इसके पश्चात आचार्य श्री द्वारा मंच पर दीक्षार्थी मंजू दीदी के पंचमुष्ठि केशलोच किए ।

 

मंगल द्रव्य से मस्तक एवं हाथों पर दीक्षा के संस्कार किए गए ।मंच पर मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं आर्यिकाश्री महायश माताजी ने मंच से दीक्षा संस्कार विधि की सभी को जानकारी दी ।उदयपुर के दीक्षा इतिहास और दीक्षार्थी का परिचय दिया ।गृहस्थ अवस्था के गनोदिया परिवार द्वारा नवीन आर्यिका श्री को संयम उपकरण पिछी,कमंडल शास्त्र एवं कपड़े दिए गए ।इस अवसर पर धरियावद पारसोला सलूंबर गिंगला मुंबई तथा निकट के अनेक नगरों से हजारों समाजजन परिजन दीक्षा समारोह में शामिल हुए ।उल्लेखनीय है कि सन 1958 में जन्मी ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी सन 1984 से आचार्य संघ में शामिल होकर प्रतिमा व्रत धारी है ।आपने अभी तक 100 से अधिक दीक्षाएं देखी है ।आपके गृहस्थ अवस्था के माता-पिता भी प्रतिमा व्रत धारी थे। नूतन आर्यिका माताजी के धर्म के माता-पिता बनने का सौभाग्य छोटे भाई गौरव गनोदिया आपने एक माह में 25 दिन का ब्रह्मचर्य व्रत आचार्य श्री से लिया है को प्राप्त हुआ पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धरियाबाद की निवासी ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी को पांचवी दीक्षा दी है इसके पूर्व धरियावद के चार भव्य प्राणियों को आचार्य श्री दीक्षा दे चुके हैं।मंजू दीदी के परिजन उदयपुर भी रहते हैं उसे दृष्टि से आचार्य श्री के उदयपुर नगर में दीक्षित शिष्यों की संख्या अब 12 हो गई है कार्यक्रम का सुंदर संचालन प्रकाश सिंघवी भी ने किया।
राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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