मुनिश्री सुयश सागर जी महाराज को जिन शासन प्रभावकीकी उपाधि से अलंकृत किया गया यह संसार असार है राग से वैराग्य की ओर जाना ही आत्म कल्याण और मोक्ष की प्राप्ति का रास्ता है मुनि श्री सुयशसागर महाराज

धर्म

मुनिश्री सुयश सागर जी महाराज को जिन शासन प्रभावकीकी उपाधि से अलंकृत किया गया यह संसार असार है राग से वैराग्य की ओर जाना ही आत्म कल्याण और मोक्ष की प्राप्ति का रास्ता है मुनि श्री सुयशसागर महाराज
झुमरीतिलैया
परम पूज्य 108 सुयश सागर गुरुदेव का 14वां दीक्षा महोत्सव बड़े ही भक्ति पूर्वक धूमधाम के साथ मनाया गया पूरे भारतवर्ष के देश प्रदेश से सैकड़ो भक्त गुरुदेव के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचे।

 

 

 

 

 

श्रमण मुनी परम तपस्वी 108 सुयश सागर जी महाराज की दीक्षा जयंती मनाई गई। प्रातःबेला में विश्व शांति मंत्रों से भगवान का अभिषेक एवं ध्वजारोहण कोलकाता से आए भागचंद विनीत कुमार छाबड़ा सौभाग्यशाली परिवार ने किया इन पुण्यार्जक परिवार को घोड़े की बग्गी में बैठाकर नगर भ्रमण कराया गया।

बैंड बाजा और गुरुदेव के जयकारों का भक्त जनों ने जय घोष किया देश प्रदेश दुर्ग रायपुर रायगढ़ बलोदा बाजार जयपुर कोलकाता खूंटी हजारीबाग गया से आए हुए सैकड़ो भक्तजन परिवार ने गुरुदेव का पद प्रक्षालन कर अपने जीवन को कृतार्थ किया ।भक्त जन के द्वारा उन्हें शास्त्र भेंट किया गया।

जैन समाज ,महिला मंडल, बालिका मंडल ,जैन युवक समिति ने संगीतमय नृत्य के द्वारा अष्ट द्रव्य से गुरुदेव की पूजा अर्चना की।

 

समाज के मंत्री ललित सेठी चातुर्मास कमेटी के संयोजक पदाधिकारी और संपूर्ण जैन समाज ने पूज्य श्रमण मुनि 108 सुयश सागर जी गुरुदेव को “जिन शासन प्रभावक” की उपाधि से अलंकृत किया।आज दीक्षा महोत्सव पर पूज्य संत सुयश सागर जी ने अपनी अमृतवाणी में कहा कि यह संसार असार है राग से वैराग्य की ओर जाना ही आत्म कल्याण और मोक्ष की प्राप्ति का रास्ता है गुरु बहुत उपकारी होते हैं।

 

लक्ष्य यदि निश्चित हो तो व्यक्ति सही मार्ग पर पहुंच ही जाता है जैन धर्म में मोक्ष की प्राप्ति के लिए दीक्षा लेना आवश्यक है, बिना दीक्षा के आत्म कल्याण संभव नहीं है। दीक्षा लेकर ही सम्यक दर्शन ज्ञान चारित्र को प्राप्त किया जा सकता है तत्वों का निर्णय एकांत में ही हो पाता है भीड़ में नहीं व्यक्ति को पुण्य कर्म के उदय होने पर ही मान सम्मान और यश वैभव मिलता है।संसारी व्यक्ति अधिक पाप कमाता है ।बैरागी व्यक्ति आत्म कल्याण में लीन रहता है।

यह मन वचन शरीर कैसे प्रसन्न हो इसके लिए कार्य करना चाहिए। जब समय आता है तब समय चला जाता है इसलिए अच्छे समय का इंतजार नहीं करना चाहिए जीवन का हर पल आत्म कल्याण और धर्म सेवा भाव में लगाना चाहिए।

 

 

इन अनुपम पलो में सुबोध गंगवाल ने गुरुदेव के प्रति अपने भजनों के द्वारा भक्ति प्रदर्शित की समाजसेवी किशोर जैन पांडया सुशील जैन छाबड़ा सुरेश झाझंरी उपाध्यक्ष कमल सेठी सह मंत्री राज छाबड़ा कोषाध्यक्ष सुरेंद्र काला सरोज पापड़ीवाल पप्पू छाबड़ा सुनीता सेठी ममता सेठी संदीप सेठी मनीष सेठी निवर्तमान पार्षद पिंकी जैन ने पूज्य गुरुदेव के दीक्षा महोत्सव पर उनको नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

नवीन जैन राजकुमार अजमेरा से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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