सत्य के बिना कल्याण होने वाला नहीं है आज सत्य को जानते हुए अनर्थ कर रहे है–मुनि पुगंव श्रीसुधासागर महाराज

धर्म

सत्य के बिना कल्याण होने वाला नहीं है आज सत्य को जानते हुए अनर्थ कर रहे है–मुनि पुगंव श्रीसुधासागर महाराज
आगरा
–सत्य के बिना कल्याण होने वाला नहीं है आज सत्य को जानते हुए भी अनर्थ कार्य कर रहे हैं।

सम्यदृष्टि को संयम चाहिए ताकत वान है शक्ति वान के लिए संयम चाहिए जो जितना शक्तिशाली होंगा उसको उतना ही संयमी होना जरूरी है। यह उद्गार हरि पर्वत आगरा में अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर की विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए।

 

 

 

आज धूप क्षेपण करने का विशेष महत्व हैदस लक्षण महा पर्व पर आज धूप दशमी के दिन धूप खेने का विशेष महत्व है सभी शिविरार्थी ने कुंडो में धूप समर्पित की उन्होंने कहा कि जितने अतिचार बताये अणुव्रत के लिए ही बताये है महाव्रती के लिए तो कोई अतिचार बताये ही नहीं है अतिचार का महाव्रती के साथ कोई मतलब ही नहीं है नदी दो किनारे के बीच बहती जाती है बहते बहते अपनी यात्रा पूरी करतीं हैं नदी जब अपनी मर्यादा का उल्लघंन करती है तो बाढ़ का रुप ले कर सब को उजाड़ती चली जाती है ऐसे ही सत्य अपनी मर्यादा लांघ कर सब का नाश कर देता है।

 

 

इसलिए इस पर संयम के अंकुश की आवश्यकता है सत्य से ज्ञान तो हो जायेगा कल्याण नहीं होता कल्याण जव भी होगा संयम से होगा चारित्र धारण करने से होगा सत्य सब कुछ देखने को कहता है संयम सब कुछ देखने को तो छूट देता है लेकिन छूने की मनाही करता है रावण ने सीता जी को सबसे सुन्दर माना लेकिन एक ग़लती करदी छूने की कोशिश की और क्या हुआ सारा संसार जानता है संसार प्राणी की आदत है कि सुन्दर वस्तु देखी और पाने की छूने की चाह रखने लगता है तब ही तो पीछे से दंड मिलता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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