कैलाश विजयवर्गीय ने तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज का लिया आशीष संतों के जन्म की पुण्यधरा भारत हैं विजयवर्गीय
पुष्पगिरी
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्रीमान कैलाश विजयवर्गीय ने पुष्पगिरी तीर्थ पहुंचकर तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज का आशीर्वाद लिया
इस अवसर आचार्य श्री ने उत्तम शौच धर्म पर प्रकाश डाला और कहा प्रभु का ध्यान और मन का स्नान उत्तम शौच धर्म है। मन को निर्मल करना प्रभु को पाने की उत्तम सीढ़ी है।इस अवसर पर विजयवर्गीय का क्षेत्र कमेटी की ओर से अभिनंदन किया गया।


श्री विजयवर्गीय ने आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज को नमन करते हुए कहा कि आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज का मुझ पर बहुत आशीष है। साथ उन्होंने यह भी कहा कि संत का जीवन जीना कोई आसान नहीं होता है। उन्होंने एक पंक्ति के द्वारा संत जीवन के प्रति भाव प्रकट किया और कहा कि जोरन को जीते वह वीर कहलाता है, और जो खुद को जीत लेता है वह महावीर कहलाता है। भारत को संतों की जन्म की पुण्य धरा बताते हुए। समाज में व्याप्त बुराई को बचाने में संत समाज की बहुत बड़ी देन है।
स्वयं को सनातन धर्म का अनुयायी कहा बताते हुएमैं सनातन धर्म का अनुयायी हूं, सनातन धर्म और जैन धर्म बहुत प्राचीन धर्म है। यह धर्म मानवता का धर्म कहलाता है।

आज की वर्तमान यथा स्थिति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि आज लोग रामचरितमानस, साधु संतों पर गलत टिप्पणी करते है, उन्हें बुरा बोलते है। लेकिन वे भूल गए है,


हमारे धर्म को समाप्त करने वाले खुद ही समाप्त हो जाएंगे। पूज्य श्री ने अपने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। और एक पुस्तक भी प्रदान की
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
