गलतियां हमेशा क्षमा की जा सकती है अगर आपके पास उसे स्वीकार करने का साहस हो..!आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी
उदगाव
भारत गौरव साधना महोदधि सिंहनिष्कड़ित व्रत तपस्वी अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहाँ की
गलतिया याँ हमेशा क्षमा की जा सकती है। अगर आपके पास उसे स्वीकार करने का साहस हो..!
महाराज श्री ने कहा की वह क्षमा उत्तम है – जिसमें रंच मात्र भी क्लेश और संक्लेश परिणाम ना हो, क्षमा करने के बाद। क्षमा करने वाला बड़ा होता है और नहीं करने वाला छोटा होता है। प्रेम-मैत्री उनमें होती है, जिनमें क्षमा करने का साहस हो और क्षमा मांगने की हिम्मत।



पृथ्वी की तरह सहनशील बनो, लोग खोदते हैं, पीटते हैं, पांवों से रौंदते हैं, उस पर मल मूत्र का विसर्जन करते हैं, तब भी वह कभी क्रोध नहीं करती। सदा क्षमा ही करती है। इसलिए संस्कृत में पृथ्वी का नाम क्षमा भी है। क्रोध करो परन्तु बच्चों जैसा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
