मुनि पुंगव सुधासागर महाराज सानिध्य में हुआ श्रावक संस्कार शिविर का हुआ शुभारंभ

धर्म

मुनि पुंगव सुधासागर महाराज सानिध्य में हुआ श्रावक संस्कार शिविर का हुआ शुभारंभ
आगरा
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज सानिध्य में हो रहे श्रावक संस्कार शिविर का आज शुभारंभ हो गया

 

इस श्रावक संस्कार शिविर हजारो शिविरार्थी पहुंचे। मानो ऐसा लग रहा था की संपूर्ण आगरा नगर धर्म के वातावरण से प्रज्वलित हो रहा हो।


आयोजन का आगाज ध्वजारोहण व मंगल कलश स्थापना के साथ हुआ तीसंवा अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर का आगाज हो गया। पूज्य श्री ने अपने उद्बोधन में कहा खुशी मनाने के लिए भारत में तोहार आते हैं। जब जब कोई अपने परिजनों मित्रों शहर वासियों के साथ मिलकर खुशी मना रहा है तो समझ लेना त्योहार मनारहा है।

 

 

 

 

और दुख को सहन कर समता पूर्वक धर्म ध्यान कर रहा हो समझ लेना पर्व मनाया जा रहा है। सारे शहरवासी मोक्ष जाना चाहते हैं। शिविरार्थी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए महाराज श्री ने कहा कि सभी शिविरार्थी मोक्ष जाना चाहते हैं और आप जो दार समर्थन कर रहे हैं तो मोक्षमार्ग क्या है। द मोक्ष जाने का साधन है मुनि पद धारण करे ।

हरि पर्वत पर विशाल अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए।


समारोह का प्रारंभ विनोद भइया के मंगलाष्टक गान के साथ हुआ जहां शांतिधारा प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप जैन सुयश, सुकांत भया, महावीर भया के मंत्रोच्चार के साथ हुआ। इन अनुपम क्षणों में ध्वजारोहण मंगल कलश स्थापना निर्मल कुमार वीरेन्द्र कुमार मोट्या परिवार,हीरालाल विभु बैनाडा परिवार राजेश कुमार निखिलकुमार शोभित कुमार सेठी परिवार आगरा ने किया। इनका सम्मान कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप पी एन सी कार्यध्यक्ष पी एल बेनाड़ा,जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री नीरज जैन जिनवाणी, संयोजक मनोज बाकलीवाल, शिविर निर्देशक हुकम काका, दिनेश गंगवाल मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा,सहित अन्य सदस्यों ने किया।

इस अवसर पर मुनि पुंगव ने कहा कि दुनिया में कोई क्षमा मांगने से महान नहीं हुआ, क्षमा करने से महान बना। महाराज श्री रामचंद्र जी का उदाहरण देते हुए कहा कि श्री रामचन्द्र जी ने लंका वासियों को क्षमा कर दिया युद्ध करके लंका को जीतकर भी लंका वासी विभीषण को राज्य सौंप दिया। हमारे बाधक तत्व को हटाने के लिए दस धर्म हमारे सामने आये है उत्तम क्षमा मांगने से क्षमा धर्म नहीं होगा क्षमा करने का दिन है करोड़ों वार क्षमा मांगने से क्षमा धर्म आत्मा में नहीं उतरा अंदर से शुभ भावों से क्षमा करने का दिन है दस धर्मो में सबसेकठिन धर्म है।आज क्षमा करना बहुत ही कठिन है।किसने बुरा किया है उसकी लिस्ट बनाओ आज कौन कौन है तुम्हारा दुश्मन जिसने तुम्हारी नींद हराम की‌ है। दुश्मनो की सूची बनाओ। जिन्होंने तुम्हारे साथ दुर्व्यवहार किया है। उसके पास क्षमा मांगने जाओगे‌ तो वह तुम्हें मार डालेगा इसलिए तुम भले ही नहीं जाना बस इतना कर लेना तो बेडा पार हो जायेगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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