96 प्रतिशत ने माना कि हमारे देश का नाम भारत हो न कि इंडिया संजय जैन बड़जात्या कामां का अनोपचारिक सर्वे

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96 प्रतिशत ने माना कि हमारे देश का नाम भारत हो न कि इंडिया संजय जैन बड़जात्या कामां का अनोपचारिक सर्वे

वर्तमान में G20 का सम्मेलन चल रहा है जिससे भारत की पूरे विश्व में नई पहचान के साथ मजबूती भी कायम हो रही है। इसी बीच भारत के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए निमंत्रण पत्र में प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया ना लिखकर प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखा और उधर प्रधानमंत्री जी ने भी और इसी के साथ पूरे देश में एक बहस प्रारंभ हो गई कि हमारे देश का नाम दोगला अर्थात हिंदी में भारत एवं अंग्रेजी में इंडिया नहीं होना चाहिए।

 

 

 

हमारे देश का केवल एक ही नाम रखा जाए और इस बात को लेकर व्यापक चर्चा हुई सभी ने बढ़-चढ़कर यह कहा कि हमारे देश का नाम इंडिया नहीं भारत ही रखा जाए।

 

 

 

इसी संदर्भ में संजय जैन बड़जात्या कामां द्वारा फेसबुक के कुछ ग्रुपों के माध्यम से एवं व्हाट्सएप पर एक अनौपचारिक सर्वे किया गया। जिसमें लगभग 24 घंटे में 8500 लोगों ने अपने वोट करते हुए अपनी राय प्रकट की। सर्वे में पूछा गया कि हमारे देश का नाम भारत या इंडिया । उसके चार ऑप्शन दिए गए (A) भारत (B)इंडिया (C) दोनों (D) कोई राय नहीं

 

किये गए वोट प्रतिशत पर दृष्टि डाले तो 96.5% ने A ऑप्शन भारत व मात्र 1% ने इंडिया,2% ने दोनों एवं .5% ने कोई राय नही पर वोट किया। इससे स्पष्ट होता है कि भारत के लोग यही चाहते हैं कि हमारे देश का नाम केवल और केवल भारत रखा जाए ऐसा सर्वे यदि पूरे देश में हो तो लोगों की स्पष्ट राय निकाल कर आ सकती है और हम दासता के प्रतीक इंडिया को अलविदा कह सकते हैं।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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