रक्षाबंधन पर्व पर धर्म की रक्षा का संकल्प लेते हुए भगवान श्रेयांसनाथ को निर्वाण लाडू समर्पित किया गया
रामगंजमंडी
श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय मे रक्षा बंधन पर्व पर भारी उत्साह देखा गया सुबह से ही भक्तो के आने का क्रम शुरू हो गया आयोजन के क्रम मे सर्वप्रथम हमारा श्रावक परिवार द्वारा श्रीजी का अभिषेक एवम शांतिधारा की गयी जिसमे सभी ने उत्साह से भाग लिया
समस्त क्रियाएं विधि विधान से प्रशांत आचार्य एवं आकाश आचार्य ने सम्पन्न करवाई उसके बाद निर्वाणकाण्ड बोलते हुए भगवान श्रेयांसनाथ का अर्घ बोलते हुए निर्वाण लाडू समर्पित किया इसी बेला मे मौजूद भक्तो ने धर्म की रक्षा का संकल्प लेते हुए भगवान के चरणों के समक्ष रक्षा सूत्र समर्पित किया एवं संकल्प का उच्चारण किया की जब तक हम सभी के अंदर समर्थता रहेगी तब तक धर्म की रक्षा एवं सेवा करने से कभी पीछे नहीं हटेंगे।

जैन दर्शन में रक्षाबंधन का महत्व
इस दिन भगवान श्रेयांसनाथ भगवान मोक्षकल्याण महोत्सव मनाया जाता है इस दिन विष्णुकुमार मुनि ने अकम्पनाचार्यादि 700 मुनिराजो का उपसर्ग दूर किया था इसी खुशी में सभी साधार्मियों ने आपस में रक्षा सूत्र बांधे थे तभी से जैन धर्मावलंबी रक्षाबंधन पर्व बडी श्रद्धा एवं वात्सल्य की भावना से मनाते हैं।

प्रातः कालीन प्रवचन की वेला में ऐलक श्री क्षीर सागर जी महाराज रक्षाबंधन पर्व की कथा सुनाते हुए कहा कि प्रत्येक धर्मात्मा का परम कर्तव्य हैं कि हमें अपने साधर्मी के ऊपर आपत्ति आने पर उसकी भरपूर मदद करनी चाहिए।


सहयोग की शुरुवात हमेशा अपने घर से करनी चाहिए घर के बाद अपना कुटुंब फिर समाज आदि का सहयोग और सहायता ही वात्सल्य भाव को पोषित करता हैं।

रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ आपस में वात्सल्य बड़े ऐसी भावना हैं। हम सभी परस्पर में प्रेमभाव से जीवन व्यतीत करें और समर्थता हो तो सभी को सहयोग प्रदान करते हुए आगे बढ़ाएं।
अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
