एक दिन सावन मास में जैसे ही रामटेक से फोन आया तो जीवन भर के लिए हमारा श्रावण मनाया जाना शुरू हो गया। निर्दोष सागर महाराज

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एक दिन सावन मास में जैसे ही रामटेक से फोन आया तो जीवन भर के लिए हमारा श्रावण मनाया जाना शुरू हो गया। निर्दोष सागर महाराज

सागर
भाग्योदय तीर्थ परिसर में मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज का दीक्षा दिवस मनाया गया दीक्षा दिवस पर प्रकाश डालते हुए पूज्य मुनि श्री ने एक उदाहरण के माध्यम से समझाया कि यदि गंज को गुड़ खिलाया जाए और उससे पूछा जाए कि कैसा स्वाद लगा तो वह इशारे में ही बताएगा। उसी प्रकार यदि दीक्षा का अनुभव करना है तो मुनि मुद्रा में आना होगा।

 

 

 

 

उन्होंने एक उदाहरण और दिया कि एक पंडित ने 3 दिन तक अपने आपको कमरे में बंद रखा। और वे निर्वस्त्र हो गए थे। इसके द्वारा उन्होंने अनुभव करना चाहा लेकिन वह अनुभव नहीं हो पाया जो उन्हें होना चाहिए। वेश बदल गया पर भाव बदले की नहीं, यह महत्वपूर्ण होता है। इस
संसार में चेहरे बाहर से तो गोरे दिखते हैं परंतु अंदर से बारूद भरे होते हैं।

महाराज श्री ने दीक्षा की स्मृति को लाते हुए कहा कि आचार्य श्री ने हमें दीक्षा देते समय कहा था कि सात फेरे पढ़ते ही कन्या पराई हो जाती है। उसी प्रकार गुरुदेव का हाथ पढ़ते ही आपका नाम बदल गया। और परिवार भी छूट गया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गुरुदेव की चौखट पर नाक रगड़ते रगड़ते 23 साल बीत गए। गुरुदेव हमें कहा करते थे कि अभी जल्दी नहीं करो। लेकिन एक दिन श्रावण मास में जैसे ही रामटेक से फोन आया तो जीवन भर के लिए हमारा श्रावण मनाया जाना शुरू हो गया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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