आपका कोई करे सम्मान या अपमान आप को शांत रहना चाहिए अजित सागर महाराज
सागर
पूज्य मुनि श्री अजित सागर महाराज ने इच्छाओं की निरोध करने की बात कही उन्होंने संकल्प के विषय में कहा कि संकल्प में कुछ नहीं होता है सिर्फ इच्छाओं का निरोध होता है और इच्छाओं का निरोध तप कहलाता है।
साधु और गृहस्थ के विषय में कहा कि साधुओं का ज्यादा हंसना ठीक नहीं कहा गया है। एवं उनकी हंसी में असंयम नही झलकना चाहिए। गृहस्थो के जैसे नहीं हंसना चाहिए, बल्कि साधु संतों को प्रसन्न रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि साधुओं को समता और श्रावक को संतोष रखना चाहिए। समता रखने वाले घर बार सब छोड़ सकते हैं। लेकिन संतोष वाले सभी कुछ नहीं छोड़ सकते। इच्छाए कम होना ही समता है।
सीख देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को कभी भी अपनी व्यथा किसी को नहीं सुनाना चाहिए। यह घर घर की कहानी होती है उससे अपनी ही हानि है। यदि पड़ोसी पीड़ित है तो उसकी जान बचाना आपका परम कर्तव्य होता है। और इसे ही मानवता और धर्म कहा गया है।

हनुमान जी का उदाहरण देते हुए कहा कि राम भक्त हनुमान बहुत ही शक्तिशाली थे इसका कारण एक ही रहा उन्होंने अपने पूर्व जन्म में साधु संतों की श्रावक बनाकर खूब सेवा की थी। उसी के प्रतिफल स्वरूप उन्हें शक्तिशाली बना कर भगवान ने दिया था। उन्होंने अंत में कहा कि जिसे भी मान सम्मान की चाह होती है इसका आशय यह है कि वह अभी राग द्वेष से भरा हुआ है। आपका कोई सम्मान करें या अपमान करें आपको शांत रहना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
