जिए तो ऐसे जियो जैसे कमल रहता है पानी में सुव्रत सागर महाराज
बीना
पूज्य मुनि श्री 108 सुव्रतसागर महाराज ने नगर के शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अपनी धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिए तो ऐसे जियो जैसे कमल रहता है पानी में
जीवन के यथार्थ सत्य को परिलक्षित करते हुए महाराज श्री ने कहा कि जीवन की सत्यता है कि जीने का महत्व तभी होता है जब उसका जीना सार्थक हो, हम स्वयं और दूसरों के भाग्य का निर्माण नहीं कर पाए हैं। बातें तो सब पर की जा सकती है लेकिन भरोसा सब पर नहीं होता। इस बात की ओर ध्यान इंगित किया कि मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ने वाला व्यक्ति कभी कुछ खोता नही। अगर वह कुछ होता है तो सिर्फ परिग्रहों को। मोक्ष मार्ग में जाने की प्रक्रिया तो केशलोच से होती है। एक उदाहरण के माध्यम से महाराज श्री ने बताया कि जिस प्रकार साधारण मिट्टी भी घड़ा बनाना चाह रही है। और कुम्हार के द्वारा उसमे अपनी कुदाली भी चला दी है।

जो भी व्यक्ति चढ़ने की कोशिश नहीं करेगा वह फिसलेगा ही। श्रावक को मोक्ष मार्ग पर चलने के लिए गुरु के पास स्वयं आना पड़ेगा। जो मर्यादा विहीन जीवन जीता है, उसके जीवन की कोई सार्थकता नहीं है। महाराज श्री ने अंत में कहा कि जहां भी आपका मन है, और वह मन का समर्पण ही सच्ची श्रद्धा है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
