स्वतंत्र होने का साहस करो मुनि श्री भाव सागर महाराज

धर्म

स्वतंत्र होने का साहस करो मुनि श्री भाव सागर महाराज
घाटोल
नगर के बासपूज्य दिगंबर जैन मंदिर में पूज्य मुनि श्री 108 भाव सागर महाराज ने अपने प्रवचन में युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि युवा ही है जो एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।

 

 

मुनि श्री ने इस बात की सीख दी कि कोई भी काम करने से पहले हार नहीं मानना चाहिए नहीं तो वह कार्य सफल नहीं हो पाता है। उन्होंने अपने प्रवचन में स्वतंत्र होने के लिए साहस करने की बात कही। युवा एक युवा है युवा की कोई उम्र नहीं होती है।

युवाओं के अंदर एक अद्भुत ऊर्जा होती है। युवाओं के अंदर ही परिवर्तन लाने की शक्ति होती है। हम अगर इतिहास पर गौर करें तो युवाओं ने इतिहास और भूगोल को बदला है। इसी के साथ युवा शक्ति के माहौल से ही देश में बदलाव आया है।

 

 

 

पूज्य मुनि श्री ने युवा शक्ति के प्रेरक बनकर कहा कि युवा शक्ति के द्वारा ही धर्म की तरक्की हो सकती है साथ ही उन्होंने कहा कि युवा शक्ति की भागीदारी के बिना कोई भी कार्य अधूरा रहता है। पूज्य मुनि श्री ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि एक समाज को प्रगतिशील और गतिशील बनाने के लिए युवा लोगों को इसका हिस्सा बनना चाहिए। आज के युग में बल आशा और कल का नेता बताते हुए युवाओं के प्रति महाराज श्री ने आगे कहा कि वे बड़े पैमाने पर हमारे देश और समुदाय का चेहरा है।


उन्होंने विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि इस बात पर संदेह नहीं किया जा सकता कि युवा ही देश के भविष्य को आकार दे सकता है। यदि युवा मेहनती और परिश्रमी होगा तो वह राष्ट्र की प्रगति में सहायक है। इसके विपरीत यदि देश का युवा आलसी एवं सुस्त होगा तो देश का पतन निश्चित है। और उस देश को पतंग से कोई नहीं बचा सकता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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