व्यक्ति का जो स्वभाव है वही उसकी महासत्ता है अजीत सागर महाराज
सागर
पूज्य मुनि श्री 108 अजीत सागर महाराज ने मनुष्य की जीभ के विषय में बताया की और कहा कि मनुष्य धोखा दे सकता है लेकिन जानवर नहीं।
मानव के स्वभाव प्रकृति के विषय में बताया कि मनुष्य का जब क्रोधी स्वभाव होता है तब उसका चेहरा तमतमाया हुआ दिखाई देता है। इसके विपरीत अगर वह शांत स्वभाव में है तो वह मुस्कुराता हुआ दिखाई देता है।
व्यक्ति के स्वभाव को महासत्ता बताते हुए कहा कि ज्ञान ही व्यक्ति की महासत्ता का भान कराता है और उसी के कारण वह राग देश की ओर नहीं जाता है। और वह केवल ज्ञान की प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने इस बात पर भी बात कही कि संकीर्णता जहां पर नहीं होती है वहां महासत्ता होगी। व्यक्ति ने यदि छोटे पन का त्याग किया है तो वह बड़ा बनकर प्राप्त होता है।
महाराज श्री ने नाव का उदाहरण देते हुए कहा कि विशाल महासागर को पार करने के लिए एक छोटी सी नाव के द्वारा पार कर लिया जा सकता है। चाहे नाव समुद्र के सामने तिनके के समान दिखाई पड़ती हो। बशर्ते नाव में कोई छेद नहीं होना चाहिए। इसी तरह यदि मनुष्य को संसार सागर से पार होना है तो तो मनुष्य को सबसे प्रथम ह्रदय कषाय, राग देश रहित होना होगा। ऐसा करने से मनुष्य जीवन की नाव भव से पार होगी। उन्होंने अपने वचनों को सोच समझकर बोलने की बात कही। इस विषय पर बोलते हुए कहा कि जीवन का एकवचन अमृत की तरह होता है तो दूसरा वचन जहर का काम करता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
