सच्ची शरण धर्म में ही है किसी और के पास बैठोगे तो गर्त में जाओगे अजीत सागर महाराज
सागर
भाग्योदय तीर्थ परिसर में मूकमाटी महाकाव्य पर अपने उद्बोधन देते हुए मुनि श्री अजीत सागर महाराज ने प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि आपको अपने अंदर लहर पैदा करनी चाहिए क्योंकि आपके पास वह शक्ति है जिससे आप सब कुछ कर सकते हैं।
महाराज श्री ने भगवान के समक्ष पूजन करने का महत्व बताया और कहा कि अगर भगवान के समक्ष तन्मय होकर पूजन करते हैं तो भक्ति चरित्र का प्रतीक कही जाती है। बिना चरित्र के ज्ञान दर्शन का कोई महत्व नहीं होता है। पूज्यश्री ने सीख देते हुए कहा कि सोचने से और घर बैठने से कल्याण कभी संभव नहीं होता है। आगे बढ़ने पर ही कल्याण हो सकता है। साधना के विषय पर महाराज श्री ने कहा कि साधना करने के लिए अनुकूल हो वही भोजन करना चाहिए। इंद्रिय संयम का पालन करना अपनी इंद्रिय संयम को बांध लेना होता है। एक उदाहरण के माध्यम से महाराज श्री ने समझाया की यदि बिजली होती है तो उपकरण जलते हैं और बलवा भी जलते हैं। बिजली नहीं होती है तो करण नहीं चल पाते हैं। करंट दिखता नहीं है बस प्रभावित होता है। लाइन में लगे रहो। यदि भटकते वह तो भटकते ही रहोगे। दिन के चरणों में गति होती है नहीं प्रगति होती है। उनके चरणों की पूजा होती है।
और उन्हीं के चरण को छूना चाहिए। गुरु महिमा के बखान करते हुए कहा कि गुरु के चरणों में ही सुख शांति मिलती है गुरु जी स्वयं सुख के मार्ग पर चलते हैं चलते हैं और उनके मार्ग पर चलकर दुर्भाग्य को दूर करना है है तो भगवान और गुरु की शरण में पहुंचे। गुरुदेव का कहां करते हैं चक्की शरण ही धर्म होती है। यदि किसी और के पास बैठोगे तो गर्त में जाओगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
