नम्रता की प्रतिमूर्ति ऐलक श्री 105 नम्रसागर महाराज का वर्षा योग 2023 चंद्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी में हो रहा है।

धर्म

नम्रता की प्रतिमूर्ति ऐलक श्री 105 नम्रसागर महाराज का वर्षा योग 2023 चंद्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी में हो रहा है।

साधना संयम तप त्याग का जीता जागता उदाहरण है विनम्रता की प्रतिमूर्ति धनोरा जिला सिवनी मध्य प्रदेश के नगर गौरव ऐलक श्री 105 नम्रसागर महाराज यह हाडोती का परम सौभाग्य है कि पूज्य महाराज श्री का मंगल वर्षा योग 2023 भगवान आदिनाथ भगवान की चमत्कारिक अतिशय क्षेत्र चंद्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी में वर्षा योग हो रहा है।

 

 

पूज्य महाराज श्री के ज्ञान की धारा असीमित है वे जटिल विषयों को भी अपनी विनम्र वाणी से सरलीकरण करके युवा शक्ति को धर्म से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। उनके जीवन के विषय में जितना कहा जाए वह कम लगता है पूज्य महाराज श्री आपने गुरु द्वारा दिए गए नाम को सार्थक करके सभी को धर्म से जोड़ रहे हैं व धर्म के मार्ग पर अग्रसर कर रहे हैं।

महाराज श्री के जीवन परिचय पर एक नजर
धनोरा जिला सिवनी मध्य प्रदेश के नगर गौरव अजय कुमार जैन श्री बाबूलाल जी एवं श्रीमती केतकी बाई के अनमोल मोती रहे। आपके गृहस्थ अवस्था में श्रीमान दुलीचंद जैन, श्रीमान विजय जैन श्रीमान राजेश जैन, श्रीमान संदीप जैन आपके भाई रहे एवं इनका क्रम तीसरे नंबर का रहा। श्रीमती राजकुमारी जैन, श्रीमती राजमती जैन, श्रीमती मीना जैन, श्रीमती लाला जैन, इस तरह से इनके परिवार में कुल नो भाई-बहन रहे।

श्रीमान अजय कुमार जैन का जन्म 24 सितंबर 1969 बुधवार भाद्रपद शुक्ल 14 को धनोरा जिला सिवनी मध्यप्रदेश में हुआ इन्होंने लौकिक शिक्षा हाई स्कूल से की। उसके उपरांत आपका बचपन से ही धर्म के प्रति लगन थी और संसार के कार्यों में इन्हें बिल्कुल रूचि नहीं थी और यह संयम पद की ओर बढ़ने की ओर अपने कदम बढ़ाने के लिए बढ़ चले और आगे चलकर इन्होंने पूज्य मुनि श्री 108 सरल सागर महाराज से ब्रह्मचर्य व्रत को लेकर संसार से विरक्ति का भाव लिए अपने कदम बढ़ा दिए। यह यहीं नहीं रुके और आगे बढ़ते हुए 25 जुलाई 1991 गुरुवार को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मुक्तागिरी में क्षुल्लक दीक्षा ली। आगे बढ़ते हुए इन्होंने विगत 3 वर्षों के बाद 21 जुलाई को 1994 को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रामटेक नागपुर में विश्व बंदनी आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के द्वारा उन्हें ऐलक दीक्षा प्रदान की गई और उन्हें ऐलक श्री 105 नम्र सागर महाराज नाम दिया गया। और उन्हें इसी नाम से जाना जाने लगा और उन्होंने इसी नाम की सार्थकता को सिद्ध करते हुए धर्म की ध्वजा को जयवंत किया और आज तक करते आ रहे हैं। ऐसे महान साधक को पाकर हाडोती की धरा अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रही है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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