पूज्य गुरुदेव सुधा सागर महाराज की प्रेरणा से कुशल संचालक मनोज जैन बाकलीवाल ने गुटके की लत को छोड़ा था
एक विवरण
एक बड़े शहर में रहने वाले पिता के बेटे हो, बाप की कमाई हुई दौलत से तैयार भोगविलास की सारी सामग्री सामने रखी दिखाई दे रही हो और उम्र भी वह हो जब यौवन अपने पूरे निखार पर हो तो शायद ही कोई विरला हो जो न फिसले और उसके अंदर कोई न कोई ऐब न आए ऐसा ही हुआ आगरा के एक युवा के साथ जिनका पूरा परिवार तो सात्विक था मगर दोस्तों की सोहबत का असर ऐसा चढ़ा कि मन भर के गुटका तम्बाकू खाने लगे।
उस युवा ने कभी माँ बाप के सामने तो कभी खाया नही था सो वे नही जानते थे मगर जब शादी हुई तो पत्नि ने साँस ससुर से उनकी शिकायत की तब जाकर पता चला कि लड़का गुटका खाता हैं सभी ने खूब समझाया मगर लत ऐसी लगी थी छूटने के नाम ही नही ले रही थी जब सबने देख लिया कि वह छोड़ ही नही रहा है तो समझदारों की तरह खुद को समझा लिया कि कलह क्यों करें जब समझ आएंगी तो खुद छोड़ देगा
समय बीता सालों निकल गए फिर एक दिन एक सन्त का आना हुआ और उनके प्रवचन सुनने वह युवा भी जाने लगा सन्त की वाणी में तो जैसे जादू था लगन लग गयी और रोजाना जाकर उस युवा की आगे बैठ कर सुनने की जैसे आदत हो गयी जिस दिन प्रवचन न सुने तो लगता ही नही था कि दिन में कुछ किया भी हैं , संत भी बड़े प्रभावशाली थे वे भी उस युवा को देखकर समझ गए कि इसे सुधारा जा सकता हैं और एक दिन उन्होंने अपने प्रवचन की दिशा गुटके की तरफ मोड़ दी ऐसे ऐसे तर्क दिए कि उस युवा को उसी समय गुटके से घृणा हो आई,,
जैसे ही प्रवचन खत्म हुआ उसने सभा भवन से बाहर जाते ही जेब में रखा गुटका फेकने के लिये बाहर निकाला तो दोस्त ने टोका कि क्यों पैसे खराब करता हैं आज खाले फिर छोड़ देना लेकिन युवा तो पक्का इरादा कर चुका था सो उसने उस गुटके को वही फेंक दिया और ऐसा फेंका कि आज तक किसी ने उसे फिर खाते भी नही देखा ,,,
यह व्यक्तित्व और कोई नही जिन्होंने अपनी वाणी से कुशल संचालन से धर्म की प्रभावना में एक अमूल्य योगदान प्रदान किया है वह हम सभी के लिए आदरणीय व्यक्तित्व है जिनका नाम आज संपूर्ण विश्व में विख्यात है ऐसे व्यक्तित्व हैं श्रीमान मनोज जैन बाकलीवाल आगरा निवासी। जिन्होंने उन्हें इसे लात को छुड़ाया है वह हैं परोपकारी प्रतिभाशाली प्रभावकारी वचन सिद्धि के दाता गुरुदेव हैं निर्यापक संत मुनि पुंगव सुधासागर जी महाराज ,,, परम् सौभाग्य की बात हैं कि वर्षो बाद आज फिर पूज्यवर आगरा में चातुर्मास कर रहें हैं और मनोज जी उस सभा का संचालन कर रहे है।
ऐसे एक नही हजारो उदाहरण आपको देखने मिलेंगे यदि आगरा वाले अपने बच्चों को संस्कार युक्त करना चाहेंगे तो उनके लिये स्वर्णिम अवसर हैं अपने बच्चों को नाती पोतों को अग्रिम पंक्ति में बैठाने की व्यवस्था बनाये आप खुद भले न जाये लेकिन उन्हें भेजे ,, निश्चित मानिये चातुर्मास उपरांत आप बच्चों के बदले व्यवहार को देख कर बहुत ही सुख का अनुभव करेंगे
पूज्यवर का आशीर्वाद हम सभी को सदा मिलता रहे इसी मंगल भावना के साथ
श्रीश जैन ललितपुर की कलम से प्राप्त जानकारी
संकलित अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
