महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना मुनि श्री सुधासागर महाराज

धर्म

महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना मुनि श्री सुधासागर महाराज
आगरा
पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधा सागर महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि यदि तुम्हें महान बनना है तो एक बार दुश्मन से अपनी प्रशंसा सुनकर मरना

 

पूज्यश्री ने कहा कि यदि दुश्मन पक्ष हमारा समर्थन कर रहा है तो वह हमारी प्रशंसा है। उन्होंने कहा कि मन में यह विचार लाना की यदि विपक्ष ने मुझे चुना है तो मुझे निष्पक्ष रहना है। और यह कार्य हर व्यक्ति को करना चाहिए की अपने निंद‌को का विश्वास समर्थन जीतना है। यदि वह समर्थन जीतता है तो वह सर्वश्रेष्ठ हैं।

 

उन्हें इस बात पर भी ध्यान आकृष्ट किया कि अपनी जाति की इज्जत बचाने के लिए रात्रि भोजन मत करना करना,चाहे भूख से मर जाना लेकिन रात्रि में भोजन नहीं करना ।चाहे कमरे में बंद होकर भोजन कर लेना सारा विश्व जानता है कि जैनी कैसा होता है वैसा हमको करना है।

 

उन्होंने कहा कि अच्छा आदमी बनने को बहुत मेहनत करनी पड़ती है अच्छा आदमी बनने के लिए भगवान को भी लगना पडता है.गुरु को भी अच्छा आदमी बनाने के लिए लगाना पडता है।सब कुछ अच्छा होगा फिर भी आदमी अच्छा बन जाये कोई जरूरी नहीं है। सब कुछ अच्छा मिला भारत जैन धर्म, गुरु भगवान फिर भी हम सुधर नहीं रहे हैं। -किस्मत ह‌मारी अच्छी है कर्म अच्छा है अच्छा इंसान, होना मिला, किस्मत से माता पिता मिले हमें उनके प्रतिकूल नही चलना है। अच्छे माता पिता मिले, हमें किस्मत से जैन धर्म मिला।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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