मुनिश्री पुण्यसागर महाराज के द्वारा सिद्ध क्षेत्र सोनागिर में आर्यिका एवं क्षुलिका दीक्षा संपन्न
सोनागिर
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 पुण्यसागर महाराज के द्वारा सिद्ध क्षेत्र सोनागिर में एक आर्यिका एवम् क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की।
पूज्य गुरुदेव ने72 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी सुनीता दीदी छाबड़ा गोहाटी का दीक्षा उपरांत नूतन नाम आर्यिका श्री 105 स्वर्णमति माताजी प्रदान किया। एवम 80 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी तारा देवी ऊकावत धाटोल को क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की गई। उन्हें दीक्षा उपरांत
क्षुल्लिका 105सुवर्णमति नाम प्रदान किया गया।
मानव जीवन का सर्वोपरि लक्ष्य संयम साधना है पुण्यसागर महाराज
इस अवसर पर मुनिश्री पुण्यसागर महाराज ने कहा कि नंग अनंग तथा 5:30 करोड मुनिराज की सिद्ध भूमि पर दो भव्य जीव दीक्षा ले रहे हैं ।मानव जीवन का सर्वोपरि लक्ष्य संयम साधना है । वर्तमान में श्रावको का सीजन समाप्त हुआ चातुर्मास में साधुओं का सीजन धर्म प्रभावना का प्रारंभ होता है ।संयम से चरित्र मोहनीय कर्म के विनाश से दीक्षा के भाव होते हैं ।
इसके पूर्व पांडाल के बाहर ध्वजारोहण के बाद आमंत्रित अतिथियों द्वारा आचार्य श्री शांति सागर जी के चित्र का अनावरण कर दीप प्रवज्जलन किया गया। एवम नृत्य मंगलाचरण किया गया। पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य किशनगढ़ राजस्थान के प्रसिद्ध भामाशाह आदरणीय अशोक पाटनी आर के मार्बल एवम् श्रीमती सुशीला पाटनी किशनगढ़ तथा श्रीमती सुनीता भागचंद जी चूड़ीवाल परिवार को प्राप्त हुआ।पुण्यार्जक परिवार द्वारा मुनि श्री पुण्य सागर जी, तपस्वी मुनि श्री महोत्सव सागर जी एवम मुनि श्री उदित सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट किए गए। इस अवसर पर धर्म सभा को संहिता सूरी पंडित हसमुख शास्त्री धरियावद, ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी,आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने उपदेश दिया। सुनीता दीदी गोहाटी के केशलोच पांडाल में प्रारंभ हुए। परिजनों के एक नेत्र में खुशी के दूसरे नेत्र में दुख के अश्रु सभी को द्रवित कर रहे थे।

मुनि श्री पुण्य सागर जी ने उपदेश के बाद समाज, परिजनों,संघ के भैय्या ,दीदी,साधुओं से दीक्षा की अनुमोदना चाही।इसके बाद सौभाग्यशाली महिलाओ द्वारा चौक पुरण की क्रिया की गई।
दीक्षागुरु द्वारा पंच मुष्ठि केश लोचन कर मस्तक और हाथो की शुद्धि के बाद मस्तक,कर हस्तो पर दीक्षा संस्कार किए गए। पुण्यार्जक परिवार द्वारा नूतन आर्यिका माताजी और क्षुल्लिका माताजी को पीछी,कमंडल शास्त्र कपड़े भेट किया ।
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
