गुरु भक्ति विनय ,विवेक से करने से वैभव, बुद्धि,यश, संपत्ति और मुक्ति मिलती है आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज

धर्म

गुरु भक्ति विनय ,विवेक से करने से वैभव, बुद्धि,यश, संपत्ति और मुक्ति मिलती है आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
उदयपुर
भगवान के सामने इंद्र भूति ,वायु भूति ,आदि तीन भाइयों ने पंद्रह सौ शिष्यों के साथ भगवान के समक्ष मस्तक झुकाकर दीक्षा धारण की ।और उन्हें मनह पर्यय ज्ञान की प्राप्ति हुई ।शिष्य का गुरु के प्रति समर्पण होना चाहिए इंद्र भूति ने दीक्षा धारण की और वह गणधर बने ।गुरु से अज्ञान दूर होता है ,जीवन का कल्याण होता है यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर धर्म सभा में प्रकट की ।

 

 

आचार्य श्री ने आगे बताया कि गुरु मोक्ष मार्ग को समझाते हैं। गुरु के सानिध्य में बुद्धि ज्ञान तीव्र होता है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्रीराम ,लक्ष्मण और रावण का एक प्रसंग बताकर बताया कि श्री राम ने लक्ष्मण जी को रावण के पास जाकर ज्ञान प्राप्त करने को कहा लक्ष्मण जी वापस आ गए कि रावण ने मुझे कुछ भी उपदेश ज्ञान नहीं दिया, तब श्रीराम ने कहा कि तुम मस्तक के पास खड़े थे ज्ञान चरणों के पास खड़े होने से मिलता है ।जब लक्ष्मण जी रावण के चरणों में गए तब उन्होंने उनके ज्ञान की बातें बताई।इसलिए गुरु के चरणों से ज्ञान मिलता है इसके लिए समर्पण कर पुरुषार्थ करना होगा ,हर व्यक्ति के जीवन में गुरु अवश्य होना चाहिए गुरु के बिना जीवन अधूरा है।आचार्य श्री ने आगे बताया कि संसार रूपी समुद्र नदी के किनारे सिद्धालय है उसे पार करने के लिए दीक्षा रूपी श्रमण बनकर तेराक बनना होगा। तभी आप किनारे लग सकते हैं गुरु के सानिध्य में पुराने अवगुण छोड़कर ज्ञानरूपी नया गुण धारण करना चाहिए संसार समुद्र पार होने के लिए संयम दीक्षा धारण करना होगा गुरु सानिध्य से जीवन का उद्धार होता है। आचार्य श्री ने आगे बताया कि गुरु भक्ति से वैभव ,विनय ,विवेक, बुद्धि , यश,संपत्ति मिलती है और इसके बाद अंतिम लक्ष्य मुक्ति मिलेगी ।इसलिए गुरु के पास सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान ,सम्यक चारित्र की संपदा प्राप्त कर धनी बने ।

कोप

 

आपको गुरु सानिध्य का सौभाग्य मिला है गुरु के प्रति विनय ,समर्पण भाव होना चाहिए छोटे-छोटे नियम लेकर आप उनकी शुरुआत कर सकते हैं जिस प्रकार एक व्यक्ति छोटे व्यापारी से बढ़ा व्यापारी बन कर ही लखपति से करोड़पति बनता है, उसी प्रकार छोटे-छोटे नियम से आप सिद्धालय को प्राप्त कर सकते हैं इसके लिए आपको श्रावक फिर अणुव्रत और महाव्रत को धारण करना होगा और तभी सही मायने में गुरु पूर्णिमा बनाना तभी सार्थक होगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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