कलिंजरा में विमलसागर महाराज संघ का मंगल प्रवेश के साथ कीर्ति स्तंभ का हुआ लोकार्पण वागड़ की जनता आगे भी हमारा इंतजार कर रही है विमलसागर महाराज 

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कलिंजरा में विमलसागर महाराज संघ  के3 मंगल प्रवेश के साथ कीर्ति स्तंभ का हुआ लोकार्पण वागड़ की जनता आगे
भी हमारा इंतजार कर रही है विमलसागर महाराज
कलिंजरा

आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री विमल सागर महाराज का संग सहित गुरुवार की बेला में पाडला से मंगल विहार करते हुए कलिंजरा में मंगल प्रवेश हुआ। समाज जन द्वारा मुनि संघ की मंगल अगवानी की एवं जगह-जगह मुनि संघ का पाद प्रक्षालन किया गया भव्य शोभायात्रा के रूप में पूज्य मुनि संघ को जैन मंदिर लाया गया। अगवानी की मंगल बेला में घरों के आगे भव्य रंगोली भी बनाई गई।

 

 

 

   मुनिसंघ की सर्वप्रथम मंगल आगवानी हिरण नदी पर हुई यहां से शोभायात्रा व जयकारों के साथ मुनि संघ को जैन मंदिर लाया गया जहां मुनि संघ ने जिनालय के दर्शन किए। इसी मंगल पलों में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज कीर्ति स्तभ का लोकार्पण किया गया।

 

 

 

इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मंदिरों का विंडो धार करने से अपने आप में कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। अपनी कमाई के 25% हिस्से पर माता-पिता का अधिकार होता है। माता पिता आपको ऊंचाई तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण सीढ़ी होती है। अपनी धनसंपदा का वर्गीकरण करते हुए पूज्य मुनि श्री ने बताया कि 25% माता-पिता के लिए 25% संतान के लिए 25% स्वयं के लिए और 25% दान के लिए होना चाहिए। धन का वर्गीकरण चलता है तो आगे पहुंच जाता है और जो धन के प्रति मोहित होता है वह निरंतर पिछड़ता जाता है। कीर्ति स्तंभ पोस्ट ऑफिस समझ लेना चाहिए। अपने जीवन को कीर्ति के रूप में स्थापित किया।

 

 

 

उन्होंने कहा कि आत्मा के अंदर आनंद शक्ति है इसका उपयोग करना चाहिए जिससे हमारा जीवन सफल हो सके। कलिंजरा के मंदिर के विषय में बोलते हुए मुनि श्री ने कहा कि कलिंजरा के मंदिर को देखकर ऐसा लग रहा है कि मैं यहां रह जाऊं लेकिन अभी संभव नहीं है क्योंकि बांगड़ की जनता आकर भी हमारा इंतजार कर रही है मैं आप लोगों से अनुरोध करता हूं कि आप सभी घाटोल में ऐतिहासिक नंदीश्वर मंदिर के कार्यक्रम में पधारें और इस ऐतिहासिक धरा पर होने वाले अनुष्ठान का लाभ प्राप्त करें। वही गुरुवार की संध्या बेला में मुनि संघ का कलिंजरा से बागीदौरा की ओर बिहार हुआ।

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

 

 

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